मार्केटिंग में पार्टी के फिसड्डी होने का गम

मार्केटिंग में पार्टी के फिसड्डी होने का गम


प्रदेश कांग्रेस के एक बड़े नेता इन दिनों अपनी पार्टी की मार्केटिंग को  लेकर बेहद दुखी हैं। उनका कहना है कि इस मामले में कांग्रेस भाजपा से बहुत पीछे है। अगर पार्टी के नेता इस पर ध्यान दें तो कई मामलों में पार्टी भाजपा को पीछे छोड़ सकती है। इसके लिए वे प्रदेश की जगह केन्द्रीय नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रुप से हमलावर भी नजर आते हैं। उनका यह दुख सामने आया है द कश्मीर फिल्म को लेकर। उनका कहना है कि कांग्रेस भी अगर मार्केटिंग में पारंगत होती तो फिल्म द कश्मीर फाइल्स को कांग्रेस दिखा रही होती। इन नेता जी का कहना था कि 1990 में केंद्र में भाजपा के समर्थन से वीपी सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल सरकार चल रही थी। जगमोहन राज्यपाल थे। तब विपक्ष में रहते हुए राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कश्मीरी पंडितों के पक्ष में संसद तक का घेराव किया था। इन नेता जी की कहना था कि यदि कांग्रेस चाहती तो फिल्म रिलीज होते ही इसे लपक लेती और जो भाजपा कर रही है वह कांग्रेस करती। तब तस्वीर कुछ और होती। लेकिन कांग्रेस में नरेंद्र मोदी-अमित शाह जैसा कोई नेता ही नहीं है जो उनकी शैली में जवाब दे सके।

अब शिवराज  के नक्शे कदम पर चल रहे श्रीमंत
श्रीमंत भाजपा के अब ऐसे नेता बन चुके हैं जिनकी गिनती कांग्रेस की ही तरह प्रदेश से लेकर देश तक में पार्टी के नेता के रुप में होने लगी है। भाजपा में आने के बाद अब श्रीमंत पूरी तरह से अपनी महाराज वाली छवि को तोड़ने के प्रयासों में लगे हुए दिखना शुरू हो गए हैं। इसके लिए उनके द्वारा मामा यानि की शिवराज की शैली पर चलना शुरू कर दिया गया है। यह प्रयास उनके द्वारा जनता के बीच छवि बनाने के साथ ही भाजपा में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के रुप में देखी जा रही है। श्रीमंत के दौरों में अब शिव की शैली  दिखना शुरू हो गई है। इसके चंद उदाहरण भी सामने आ चुके हैं। इनमें शिवराज की ही तरह श्रीमंत कुम्हार के यहां जाकर चाक से मिट्टी का दिया बनाते दिख चुके हैं तो अब वे कन्या पूजन भी करते दिख जाते हैं। यही नहीं अब श्रीमंत के साथ उनके पुराने व खास समर्थक की जगह पुराने भाजपा नेता भी सम्मान पाते दिखना शुरू हो गए हैं। इसका उदाहरण भी पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव द्वारा आयोजित रहस मेले का समापन कार्यक्रम है।

केसरिया रंग में रंग सकते हैं महेश पटेल
प्रदेश के अलीराजपुर जिले के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल के कांग्रेस पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित होने के बाद महेश पटेल का संपर्क भाजपा नेताओं से हो चुका है। भाजपा नेता उन्हें केसरिया रंग में रंगने की तैयारी कर रहे हैं। यह बात अलग है कि इस मामले में पटेल जल्दबाजी में नहीं दिख रहे हैं। अगर वे भाजपा में आ जाते हैं तो भाजपा को एक मजबूत नेता इस आदिवासी जिले अलीराजपुर में मिल जाएगा, जो कांति लाल भूरिया से लेकर अन्य कांग्रेस के दिग्गज आदिवासी नेताओं को चुनौति देने का काम कर सकता है ।  उन्हें हाल ही में कांग्रेस ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उन पर पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया व मप्र युवक कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया के वाहनों के काफिले पर हुए पथराव के आरोप में की गई है। वैसे कांग्रेस में उन्हें दिग्विजय समर्थक माना जाता है। वे पिछला उपचुनाव जोबट विस का हर गए थे। इसके बाद से ही उनके व भूरिया परिवार के बीच छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है।

नाथ की अब सिंधी मतदाताओं को साधने की कोशिश
बीते विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा से नाराज सिंधी मतदाताओं ने कांग्रेस का खुलकर साथ दिया था, जिसकी वजह से कांग्रेस ने भाजपा को दो दर्जन सीटों पर हार के लिए मजबूर कर दिया था। इसकी वजह से ही कांग्रेस प्रदेश में सरकार तक बनाने में सफल रही थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष इस बार भी डेढ़ साल बाद होने वाले चुनाव में सिंधी मतदाताओं का समर्थन चाहते हैं। यही वजह है कि इसके लिए कमलनाथ द्वारा अभी से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इन प्रयासों के तहत ही उनके द्वारा हाल ही में पार्टी स्तर पर राज्य स्तरीय सिंधी कल्याण समिति का गठन किया गया है। यह बात अलग है कि दो दशक पहले मार्च 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी प्रदेश में सिंधी समाज की समस्याओं के निराकरण के लिए केबिनेट मंत्री हरवंश सिंह की अध्यक्षता में सिंधी कल्याण समिति का सरकारी स्तर पर गठन किया था, लेकिन दुर्भाग्य से 18 साल बाद भी समिति की सिफारिशें न तो सामने आ सकी और उन पर अमल ही हो सका। अब कांग्रेस इस समिति के माध्यम से उस समय की सिफारिशों का प्रचार करने की योजना बना रही है , जिससे की इस समाज को पार्टी से जोड़कर रखा जा सके।