संसद का विशेष सत्र: विपक्ष ने महिला आरक्षण अधिनियम की अचानक अधिसूचना पर सवाल उठाए

सरकार ने देर रात अधिसूचना जारी करके महिला आरक्षण क़ानून 2023 को लागू कर दिया है, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं. विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन थोप रही है.

नई दिल्ली: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत गुरुवार (16 अप्रैल) से हुई, जिसमें नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने वाला परिसीमन विधेयक 2026 पेश किया, जिस पर दूसरे दिन शुक्रवार को भी सदन में चर्चा जारी है.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग की स्थापना से संबंधित तीन विधेयकों पर लोकसभा में शुक्रवार को शाम 4 बजे मतदान होगा.

इस बीच गुरुवार देर रात सरकार ने अधिसूचना जारी करके महिला आरक्षण कानून 2023 को लागू कर दिया है, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं. विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन थोप रही है. दक्षिण भारत में परिसीमन का भारी विरोध देखने को मिला है.

इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा को आश्वासन दिया था कि परिसीमन के बाद सदन की संख्या बढ़ने पर भी महिला आरक्षण कानून लागू होने से सदन में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा.

उन्होंने कहा था कि पांच दक्षिणी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी और उनका प्रतिशत 23.76% से बढ़कर 23.87% हो जाएगा. अमित शाह आज तीनों विधेयकों पर चल रही बहस पर औपचारिक जवाब देंगे.

केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, महिला आरक्षण अधिनियम 2023, जिसके तहत विधानसभाओं में महिलाओं को 33% कोटा दिया गया है, गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) से लागू हो गया है.

हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि संसद में इसी कानून में संशोधन करके इसे 2029 में लागू करने पर चल रही बहस के बीच, 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल, 2026 से क्यों अधिसूचित किया गया.

लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने शुक्रवार को सरकार द्वारा 2023 के महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के लिए मूल अधिनियम को लागू करने से पहले विधेयक लाने के कदम पर सवाल उठाया.

लोकसभा में संविधान संशोधन पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि परिसीमन पर गहन चर्चा की आवश्यकता है. इससे संतुलन बिगड़ सकता है. नोटबंदी और परिसीमन प्रक्रिया में सरकार ने जो जल्दबाजी दिखाई है, वह राजनीतिक नोटबंदी है और इससे देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री से सलाह नहीं ली. 2021 में सरकार ने जनगणना स्थगित कर दी थी और सबसे बड़ा देश जनगणना नहीं करा सका.

कनिमोझी ने आगे कहा, ‘उन्होंने जनगणना स्थगित कर दी, अब वे उन्हें पुरानी जनगणना से इसे जोड़ रहे हैं. पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाया गया है.’

उन्होंने बताया कि 2014 में जब भाजपा सरकार में आई, तब विपक्ष ने सरकार को महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए पत्र लिखा था. संसद में यह मुद्दा उठाया था. अब सरकार दो सप्ताह भी इंतजार नहीं कर सकती.

डीएमके सांसद कनिमोझी ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं का इस्तेमाल चुनावी दांव-पेच के रूप में कर रही है.

भाजपा के पास पर्याप्त महिला प्रतिनिधि नहीं: कल्याण बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करेगी, लेकिन उनकी मांग है कि इसे संसद की वर्तमान क्षमता के अनुसार लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है.

उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास पर्याप्त महिला प्रतिनिधि नहीं हैं. लोकसभा में भाजपा के कुल सांसदों में से केवल 12.91% महिलाएं हैं और राज्यसभा में केवल 16.98%.

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण सुविधा के आधार पर नहीं होना चाहिए, यह संवैधानिक होना चाहिए, महिला आरक्षण के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए.

शुक्रवार को समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सरकार संविधान में जो संशोधन चाह रही है, समाजवाजवादी पार्टी उसके पक्ष में नहीं है, क्योंकि कहीं न कहीं परिसीमन का सहारा लेकर ये लोग पूरी प्रक्रिया को अपने सशक्तिकरण के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं. जो पहला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ था उसके अनुरूप सपा चाहती है ये लागू हो.

वहीं, संसद के बाहर अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी को समझना मुश्किल है. भाजपा के फैसलों को समझना मुश्किल है. जब लोगों से कहा गया कि एसआईआर होगा तो एसआईआर के बहाने ये लोग एनआरसी कर रहे थे. अगर भविष्य में एनआरसी होगी तो ये कौन से नए कागज मांगेंगे. अब महिला आरक्षण के बहाने ये अपने मनमर्जी परिसीमन करना चाह रहे हैं, जिससे ये कभी हारे नहीं .ये जनता देख रही है और चुनाव में भाजपा बुरी तरह हारेगी.’
उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है. सरकार इस फैसले को संसद की कुल सीटों में से एक तिहाई सीटों के महिला आरक्षण से जोड़ रही है. लेकिन विपक्षी दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे प्रतिनिधित्व जनसंख्या के अनुपात में हो जाएगा, जो कि भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में केंद्रित है.

इससे पहले गुरुवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने लोकसभा में कहा कि परिसीमन विधेयक का निर्वाचन क्षेत्रों पर इस तरह प्रभाव पड़ेगा कि ‘अल्पसंख्यकों की राजनीतिक और चुनावी शक्ति समाप्त हो जाएगी.’

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के माध्यम से सीटों का जो हेरफेर किया गया है, वह पूरे देश में दोहराया जाएगा.

सहमति के स्वर

इस संबंध में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सांसद संजय कुमार झा ने कहा, ‘पीएम मोदी ने अपने भाषण में साफ कहा है कि परिसीमन में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. जैसे कांग्रेस के समय में था वैसे ही अभी किया जा रहा है. 2023 में आप ने इसको पास कर दिया था तो विरोध किस बात का है. कैसे लोकतंत्र पर खतरा है उनको इस देश की महिलाओं पर विश्वास नहीं है.’

महिला आरणक्ष पर पर बोलते हुए हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, ‘महिलाओं को बहुत-बहुत बधाई. इस बिल को लेकर महिलाओं में एक उत्साह जगा है पीएम मोदी ने असंभव को संभव बना दिया है. 30 साल से अटके हुए बिल को पारित किया है.’

गौरतलब है कि इस मामले में अभी लोकसभा में बहस जारी है.