ईरान पर हमलों के 62वें दिन भी पश्चिम एशिया का संकट कम नहीं हुआ है. ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने के बदले अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की बात कही गई थी. इस बीच अमेरिका में युद्ध की लागत, हथियारों के इस्तेमाल और बच्चों की मौत पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं.

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों से उपजा पश्चिम एशिया संकट गुरुवार (29 अप्रैल) को 62वें दिन में प्रवेश कर गया. इस बीच अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक और आर्थिक सवाल तेज होते दिख रहे हैं.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को बुधवार को संसद की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने करीब छह घंटे तक सवालों का सामना करना पड़ा. डेमोक्रेट सांसदों ने इस युद्ध को बिना संसदीय मंजूरी के शुरू किया गया महंगा और ‘चयनित संघर्ष’ बताते हुए इसकी लागत, हथियारों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और एक प्राथमिक स्कूल पर बमबारी में बच्चों की मौत जैसे मुद्दों पर कड़ी आपत्ति जताई. कुछ सांसदों ने यह भी पूछा कि ईरानी ड्रोन हमलों के सामने अमेरिकी सैन्य तैयारी कितनी सक्षम है, क्योंकि कुछ ड्रोन रक्षा प्रणाली को भेदते हुए अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचा चुके हैं.
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने के बदले अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की बात कही गई थी. इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को टालने की शर्त भी शामिल थी.
युद्ध का आर्थिक असर भी साफ दिखने लगा है. एक शीर्ष अमेरिकी रक्षा अधिकारी के मुताबिक, अब तक इस युद्ध पर अमेरिका लगभग 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है. इस राशि का बड़ा हिस्सा हथियारों पर खर्च हुआ है, जबकि सैन्य अभियानों के संचालन और उपकरणों के प्रतिस्थापन पर भी भारी खर्च हुआ है. इसी दौरान अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिसे लेकर सरकार की आलोचना हो रही है.
लेबनान में भी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. दक्षिणी लेबनान के ज़वतार अल-शरकिया, यहमार अल-शकीफ और बैत अल-सैय्यद जैसे इलाकों पर इज़रायल की ओर से तोप से हमले किए गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में लगभग 12.4 लाख लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने की आशंका है, जो अध्ययन की गई आबादी का करीब एक-चौथाई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से जारी आर्थिक संकट और संघर्ष ने कृषि और आजीविका को गहराई से प्रभावित किया है, जिससे खाद्य सुरक्षा की स्थिति और बिगड़ रही है.
इस बीच रूस ने भी स्थिति को लेकर चेतावनी दी है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बातचीत में कहा कि अगर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर तेज होती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. क्रेमलिन ने साफ किया कि ईरानी जमीन पर किसी भी तरह का जमीनी अभियान ‘खतरनाक और अस्वीकार्य’ होगा.
पश्चिम एशिया में जारी यह संकट अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर लगातार गहराता जा रहा है, जबकि हालात सामान्य होने के संकेत फिलहाल दूर-दूर तक नहीं दिख रहे हैं.