मैहर: रेत माफिया, पुलिस और प्रशासन की ‘तिगड़ी’ पर ग्रामीणों का हल्लाबोल.

कलेक्टर कार्यालय में दी गंभीर शिकायतसोन-घड़ियाल अभयारण्य में सरेआम लूट: ग्रामीणों ने लगाया पुलिस, राजस्व और वन विभाग पर मिलीभगत का आरोप
मैहर/रामनगर:मैहर जिला बनने के बाद भी भ्रष्टाचार और माफियाराज थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सोन-घड़ियाल अभयारण्य के ग्राम कुबरी से सामने आया है, जहाँ रेत माफियाओं के दुस्साहस और प्रशासनिक तंत्र की कथित मिलीभगत ने ग्रामीणों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। जनपद सदस्य राजेंद्र सिंह (मुन्ना) के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय मैहर को एक शिकायती आवेदन सौंपकर शासन-प्रशासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।प्रशासनिक मिलीभगत पर उठे सवालग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि पुलिस प्रशासन, राजस्व

विभाग और वन विभाग की मौन सहमति के बिना संरक्षित वन क्षेत्र में इतना बड़ा उत्खनन संभव नहीं है। शिकायत में कहा गया है कि जिस क्षेत्र में सुरक्षा के सख्त पहरे होने चाहिए, वहाँ 22 जेसीबी और 150 डंपर का बेखौफ चलना स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।अधिकारियों की जान पर आफत, फिर भी माफिया बेखौफआवेदन में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि माफिया इतने बेखौफ हैं कि उन्होंने नायब तहसीलदार तक को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की। ग्रामीणों ने याद दिलाया कि इससे पहले एक पटवारी की हत्या भी इसी रेत विवाद में हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और वन विभाग की ‘शह’ के कारण ही माफिया अब सरकारी अधिकारियों की जान लेने से भी नहीं हिचक रहे हैं।लूट और बर्बादी का आंकड़ा:दैनिक अवैध वसूली: माफियाओं द्वारा प्रतिदिन लगभग 3 लाख रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।मशीनरी का जाल: मौके पर 22 जेसीबी, 50 ट्रैक्टर और 150 डंपरों का बेड़ा तैनात रहता है।पर्यावरण का विनाश: रेत निकालने के लिए सैकड़ों साल पुराने महुआ के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है।आंदोलन की चेतावनीशिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन और राजस्व विभाग ने अपनी साठगांठ बंद कर माफियाओं पर ‘रासुका’ जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण जिला मुख्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे.