अमित शाह ने लॉन्च किया नया ऐप, सड़क पर फिंगरप्रिंट स्कैन कर लोगों का रिकॉर्ड जांच सकेगी पुलिस

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘अभिज्ञान’ नामक नया ऐप लॉन्च किया है, जिसके जरिए पुलिस और जांच एजेंसियां मौके पर ही फिंगरप्रिंट स्कैन कर किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड जांच सकेंगी. ऐप 1.3 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड वाले राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा है, हालांकि इसके कानूनी दायरे पर सवाल उठ रहे हैं.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (19 जून, 2026) को एक नए मोबाइल ऐप ‘अभिज्ञान’ की शुरुआत की, जिसके जरिए पुलिस और जांच एजेंसियां अब मौके पर ही किसी व्यक्ति के अंगूठे या उंगलियों के निशान लेकर उसका आपराधिक रिकॉर्ड जांच सकेंगी. यह ऐप देशभर में मौजूद करीब 1.3 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड वाले राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा हुआ है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, यह ऐप राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने विकसित किया है. इसे नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) से जोड़ा गया है, जिसमें आरोपियों, दोषियों और जेल में बंद लोगों के फिंगरप्रिंट सुरक्षित रखे जाते हैं.

सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह मोबाइल ऐप पुलिसकर्मियों को किसी भी स्थान से प्रमाणित फिंगरप्रिंट स्कैनर के जरिए राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस तक पहुंचने की सुविधा देगा. इससे मौके पर ही किसी व्यक्ति की पहचान और उसके आपराधिक इतिहास की जांच की जा सकेगी.

ऐप के प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि फिंगरप्रिंट स्कैन को एनएएफआईएस डेटाबेस से मिलाने में लगभग 35 सेकंड का समय लगता है.

इस दौरान यह भी बताया गया कि सड़क पर नियमित वाहन जांच के दौरान यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध प्रतीत होता है, तो उसका बायोमेट्रिक स्कैन लेकर यह पता लगाया जा सकता है कि वह किसी मामले में वांछित है या नहीं. कुछ ही सेकंड में उसका आपराधिक रिकॉर्ड सामने आ सकता है. अधिकारियों का दावा है कि इससे पुलिसकर्मियों को भी सुरक्षा मिलेगी क्योंकि उन्हें पहले से पता चल जाएगा कि सामने खड़ा व्यक्ति कोई गंभीर अपराधी तो नहीं है.

अमित शाह ने कहा कि यह ऐप जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को और मजबूत बनाने में मदद करेगा.

उन्होंने कहा, ‘एनसीआरबी द्वारा विकसित ‘अभिज्ञान’ ऐप एनएएफआईएस का पोर्टेबल संस्करण है. इसमें 1.3 करोड़ से अधिक फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और अब पुलिसकर्मी अपने स्मार्टफोन से सीधे इस विशाल आपराधिक डेटाबेस तक पहुंच सकेंगे.’

शाह के मुताबिक, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन) से सुरक्षित यह ऐप कुछ ही सेकंड में फिंगरप्रिंट की पहचान करने में सक्षम है. उन्होंने इसे ‘फास्ट आईडी’, पोर्टेबल व्यवस्था और करोड़ों रिकॉर्ड तक पहुंच जैसी सुविधाओं से लैस एक बेहद शक्तिशाली उपकरण बताया.

हालांकि, इस ऐप को लेकर कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं. एनसीआरबी के एक अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि ऐसे बायोमेट्रिक सत्यापन का कानूनी आधार आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 में मौजूद है. लेकिन इसी कानून की धारा 3 यह भी स्पष्ट करती है कि फिंगरप्रिंट और अन्य पहचान संबंधी जानकारी अनिवार्य रूप से केवल उन्हीं लोगों से ली जा सकती है जिन्हें गिरफ्तार किया गया हो, किसी अपराध में दोषी ठहराया गया हो या जिनसे शांति बनाए रखने अथवा अच्छे आचरण के लिए सुरक्षा देने को कहा गया हो.

कानून में कहीं भी बिना किसी अपराध से जुड़ी ठोस आशंका के आम लोगों की रैंडम बायोमेट्रिक जांच का स्पष्ट उल्लेख नहीं है.

अमित शाह ने यह भी बताया कि देश के पास इस समय लगभग 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड मौजूद हैं. इसके अलावा करीब 9.91 लाख मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े अपराधियों का डेटा, 3.65 लाख मानव तस्करी मामलों की जानकारी और जेलों से संबंधित व्यापक रिकॉर्ड भी उपलब्ध हैं.

गृह मंत्री ने कहा कि यह पूरा डेटा देश की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है. अब चुनौती यह है कि आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़ी सभी संस्थाएं इस डेटा का प्रभावी उपयोग करना सीखें और इसे केवल रिकॉर्ड के रूप में नहीं, बल्कि अपराध नियंत्रण की व्यावहारिक क्षमता में बदलें.