भूख हड़ताल के 21वें दिन सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल लेकर पहुंची दिल्ली पुलिस, दिपके ने शुरू किया अनशन

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले कर जबरन अस्पताल में भर्ती कर दिया है. हालांकि भूख हड़ताल पर बैठे आइसा के तीन सदस्य अपनी हड़ताल जारी रखेंगे. वहीं सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने की घोषणा की है.

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने शनिवार (18 जुलाई) सुबह लद्दाख के इनोवेटर और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन हिरासत में लेकर जबरन अस्पताल में भर्ती कर दिया. वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है.
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल ले जाया गया.
सुबह सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारी पुलिस को वांगचुक तक पहुंचने से रोकने की कोशिश करते दिखाई दिए, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया. पुलिसकर्मियों ने वांगचुक को ले जाते समय उनके चारों ओर सफेद चादरों का घेरा बना लिया. बताया जा रहा है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है.

वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन छात्र कार्यकर्ता – नेहा, आमीन और मनीष – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा देश की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं.
शनिवार सुबह प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्र प्रदर्शनकारियों ने आइसा के तीनों कार्यकर्ताओं के चारों ओर मानव श्रृंखला बना ली, ताकि पुलिस उन्हें हिरासत में न ले सके. आइसा द्वारा साझा किए गए वीडियो में यह दृश्य देखा जा सकता है.

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर दावा किया कि पार्टी के नेता अभिजीत दिपके को जिस स्थान पर वे ठहरे हुए थे, वहां दिल्ली पुलिस ने घेर लिया था. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रवक्ता अनीश गावंडे, जिनके घर दिपके ठहरे थे, ने भी यही दावा किया.

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि बाद में उन्हें प्रदर्शन स्थल जाने की अनुमति दे दी गई. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘दिल्ली पुलिस ने आज इतनी गिरी हुई हरकत की है.’
पिछले कई दिनों से सीजेपी और आइसा के प्रदर्शन के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित थे. लेकिन शनिवार सुबह सीजेपी के नेताओं ने भी आइसा के प्रदर्शन स्थल से संबोधन किया और कहा कि नेहा, आमीन और मनीष अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे.

आइसा की नेहा ने द वायर से बातचीत में कहा कि वांगचुक को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने उन्हें और भूख हड़ताल पर बैठे आइसा के उनके अन्य साथियों को भी हिरासत में लेने की कोशिश की, लेकिन बहुत सारे लोगों के वहां होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए.
इस बीच, सीजेपी ने अपनी मांगों में भी बदलाव किया है. पहले पार्टी केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही थी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद अब उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है.

ज्ञात हो कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को उनके पद से हटा कर उनकी जगह 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का मुखिया नियुक्त किया था.

अटकलें थी कि दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद से सतीश गोलचा की समय से पहले विदाई का संबंध जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से है. अब नए कमिश्नर की नियुक्ति के ठीक एक दिन बाद यह कार्रवाई की गई.

चार कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल और छात्रों के इस आंदोलन पर अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. प्रदर्शनकारी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और नरेंद्र मोदी सरकार से अपील कर रहे हैं कि वह छात्रों की आवाज़ को गंभीरता से सुने और दिल्ली के जंतर-मंतर से उठ रही उनकी मांगों पर ध्यान दे.

शनिवार को सफदरजंग अस्पताल ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी जारी करते हुए कहा कि वह बहुत कमज़ोर हो गए हैं, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल ने कहा, ‘लंबे समय से भूख हड़ताल और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण वह कमजोर हो गए हैं. हालांकि, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन शरीर के सभी मानकों को सामान्य करने के लिए उन्हें लगातार निगरानी, चिकित्सकीय पर्यवेक्षण और उपचार की आवश्यकता है.’