नए वनबल प्रमुख ने अंबाड़े के बदले आदेश
भोपाल/मंगल भारत

प्रदेश में वन और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए गए है। वरिष्ठ अधिकारियों को दफ्तर में बैठने से ज्यादा मैदानी दौरे करने होंगे। इसी तरह हर महीने होने वाली वीडियो कांफ्रेंस को भी सीमित किया गया है। अब मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों से ही पूरे महकमे का फीडबैक लिया जाएगा। यह परिवर्तन नए वनबल प्रमुख शुभरंजन सेन ने बीते सोमवार को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को दिए है। उन्होंने पूर्व वनबल प्रमुख वीएन अंबाड़े के उस आदेश को भी पलट दिया है, जिसमें उन्होंने प्रत्येक सोमवार और मंगलवार को अनिवार्य वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के निर्देश दिए थे। इसी तरह विभिन्न शाखाओं द्वारा अलग-अलग बैठकें बुलाने पर भी रोक लगा दी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें अपने दफ्तर पर बैठने की जगह मैदानी दौरे करने होंगे। उनके फीडबैक के आधार पर ही विभाग मैदानी कार्यों की समीक्षा करेगी। सेन ने साफ किया कि विभाग के कार्यों की समीक्षा परिणामों के आधार पर की जाएगी और फील्ड रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। बताया गया है कि वनबल प्रमुख ने अधिकारियों को साफ कर दिया कि वे दफ्तर में बैठकर काम करने की व्यवस्था से वास्ता नहीं रखते, अलबत्ता वन अधिकारियों का मुख्य दायित्व मैदानी निरीक्षण और संरक्षण कार्य है। उन्होंने कहा कि ज्यादा वीडियो कॉन्फ्रेंस व्यवस्था से अधिकारियों को नियमित गश्त, बीट निरीक्षण और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए अधिक समय मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब गर्मी का मौसम आ गया है, ऐसे में हमें किसी भी स्थिति में वनों को आगजनी जैसी घटनाओं से सुरक्षित रखना होगा। इसके लिए अधिकारी इस दिशा में सतर्कता बरते।
रेंज स्तर का दौरा करेंगे सेन
बताया गया है कि वनबल प्रमुख शुभरंजन सेन स्वयं मैदानी दौरे पर रहेंगे। उनके द्वारा राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारणों का भी नियमित तौर पर दौरा किया जाएगा। गौरतलब है कि सेन इससे पहले पीसीसीएफ वन्य प्राणी थे। उनके कार्यकाल में कई बेहतर कार्य किए गए है।
कर्मचारियों की भी लेंगे सुध
जानकारों की मानें तो वनबल प्रमुख द्वारा वन कर्मियों की समस्याओं को निराकरण के लिए भी विशेष उपाय किए जाएंगे। उनके द्वारा जहां नियमित अंतराल में कर्मचारी समस्या निवारण शिविर लगाए जाएंगे, तो वे कर्मचारी संगठनों से भी जीवंत संपर्क रखते हुए उनकी पेंशन, पदस्थापना सहित दूसरे मामलों के निराकरण की दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे। मध्य प्रदेश कर्मचारी मंच के अध्यक्ष अशोक पांडे ने वनबल प्रमुख के प्रयासों को कर्मचारी हितेषी बताया है। उन्होंने बताया कि जब वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव थे, तब उनके द्वारा कर्मचारी समस्या निवारण का आदेश भी जारी किया गया था, किन्तु उन पर सार्थक प्रयास नहीं किए गए।
पहले ये था आदेश
तत्कालीन वनबल प्रमुख वीएन अंबाड़े के आदेश के मुताबिक हर सप्ताह सोमवार और मंगलवार को अनिवार्य रुप से वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती थी। इतना ही नहीं अलग-अलग शाखाओं के अधिकारी भी बैठकें बुलाते थे, जिससे सप्ताह में ज्यादा दिनों तक मैदानी अधिकारी इन्हीं बैठकों की वजह से व्यस्त रहते थे, जिससे उनके पास मैदानी निरीक्षण या दौरे के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। बताया गया है कि नए निर्देशों से अब डीएफओ और सीएफ स्तर के अधिकारियों को राहत मिलेगी और उन्हें वन संरक्षण या वन्य जीवों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकेगा।