वर्ष 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिवमोग्गा एयरपोर्ट का उद्घाटन करने के लिए राज्य का दौरा किया था. एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, उनके दौरे के दौरान विभिन्न कार्यक्रम में कुल 33.16 करोड़ रुपये का सरकारी धन ख़र्च हुआ था.

नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले, जब राज्य में भाजपा की सरकार थी – जो बाद में चुनाव हार गई – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी 2023 को राज्य के शिवमोग्गा एयरपोर्ट का उद्घाटन करने के लिए एक दिन की यात्रा की थी.
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने भविष्य में भी डबल-इंजन सरकार को वोट देने की अपील की थी.
एक आरटीआई आवेदन, जिसका जवाब तीन साल बाद जनवरी 2026 में मिला, से पता चला कि केवल इस उद्घाटन कार्यक्रम पर ही जनता के 18.81 करोड़ रुपये खर्च हुए.
इसके अलावा 14.35 करोड़ रुपये और खर्च हुए, जिससे उस एक दिन की यात्रा पर कुल खर्च 33 करोड़ रुपये से अधिक हो गया.
अख़बार के अनुसार, खर्चों में ‘1,800 बसें किराये पर लेने के लिए 4.11 करोड़ रुपये शामिल थे, जिनसे विभिन्न स्थानों से लोगों को मोदी के कार्यक्रम में लाया गया. इसके अलावा 1.8 करोड़ रुपये से अधिक दो मदों पर खर्च किए गए – मुख्य मंच और ग्रीन रूम के लिए वाटरप्रूफ जर्मन स्ट्रक्चर ट्रस पंडाल, मॉडल प्रेजेंटेशन और प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य के लिए फूलों की सजावट.’
उद्घाटन के बाद मोदी विशेष विमान से बेलगावी गए और फिर हेलीकॉप्टर से दोपहर में रोड शो के लिए रवाना हुए. हवाई यात्रा का खर्च इसमें शामिल नहीं किया गया है, लेकिन आरटीआई से प्राप्त अन्य दस्तावेजों के अनुसार यात्रा के इस हिस्से पर 14.35 करोड़ रुपये खर्च हुए. इसमें भी लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने के लिए बसों पर 2.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार इस एक-दिवसीय यात्रा पर कुल 33.16 करोड़ रुपये का सरकारी धन खर्च हुआ.
सूचना अधिकार कार्यकर्ता और आरटीआई तथा पारदर्शिता पर किताब के लेखक मंजूनाथ हिरेचोटी, जो लंचमुक्ता कर्नाटक संगठन से जुड़े हैं, को मिली जानकारी से यह भी पता चला कि लोक निर्माण विभाग ने कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्ट की धारा 4(g) का हवाला देकर निविदा प्रक्रिया से खुद को छूट दे दी थी.
डेक्कन हेराल्ड ने मंजूनाथ के हवाले से कहा, ‘सार्वजनिक धन चुनावी अभियान का संसाधन नहीं है. विकास परियोजनाएं चुनावों से पहले राजनीतिक प्रचार का मंच नहीं बननी चाहिए. भारत को चुनाव से पहले खर्च को नियंत्रित करने का एक वैधानिक तंत्र चाहिए, क्योंकि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले वित्तीय नियंत्रण नहीं होता. सुधार के बिना करदाताओं को राजनीतिक समय पर होने वाले फिजूल खर्च का बोझ उठाना पड़ता रहेगा.’
उन्होंने मार्च 2023 में आरटीआई दायर की थी, लेकिन राज्य सूचना आयोग से अनुकूल आदेश मिलने के बाद ही इस साल जनवरी में जवाब मिला.
जब राज्य में भाजपा की सरकार थी, तब के लोक निर्माण मंत्री सी.सी पाटिल से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें सही खर्च याद नहीं है.
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री की यात्राओं – जो अक्सर चुनावों के समय होती हैं – पर सार्वजनिक खर्च की खबर सामने आई हो. 2023 में द वायर ने लगातार चुनाव प्रचार में लगे प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्राओं और चुनावी राज्यों के साथ उनके संयोग का विश्लेषण किया था.
इससे पहले इंडियन एक्सप्रेस ने भी रिपोर्ट किया था कि कर्नाटक में योग दिवस पर मोदी की एक दिन की यात्रा पर स्थानीय निकायों द्वारा 56 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.