उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप पुच एआई से समझौता ज्ञापन से पीछे हटते हुए कहा कि इन्वेस्ट यूपी द्वारा किया गया एमओयू विस्तृत जांच-पड़ताल और परियोजना मूल्यांकन में सफल होते हैं तो आगे बढ़ेंगे, अन्यथा एमओयू रद्द कर दिया जाएगा. इस समझौते के बड़े पैमाने को लेकर सवाल उठे थे और आलोचना हुई थी.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप पुच एआई (Puch AI) के साथ 25,000 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) की अपनी ही घोषणा से पीछे हटते हुए रुख बदल लिया है. इस समझौते के बड़े पैमाने को लेकर उठे सवालों और आलोचनाओं के बाद उन्होंने यह कदम उठाया.
23 मार्च को आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया था: ‘नया उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति को अपना रहा है.’
‘पुच एआई के साथ 25,000 करोड़ रुपये का एमओयू राज्य में एआई पार्क, बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई कॉमन्स और एक एआई विश्वविद्यालय लाएगा.
‘यह पहल सुशासन को मजबूत करेगी, नवाचार को बढ़ावा देगी और हमारे युवाओं के लिए भविष्य के अनुरूप अवसर पैदा करेगी.’
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस प्रस्तावित योजना में एआई पार्क, एआई कॉमन्स प्लेटफॉर्म और एक एआई विश्वविद्यालय शामिल थे. ख़बरों में यह भी कहा गया कि लखनऊ हवाई अड्डे के पास 40 एकड़ जमीन को भारत के पहले ‘एआई सिटी’ के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि नोएडा, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज भी इस व्यापक योजना का हिस्सा हैं.
हालांकि, कई पाठकों और विश्लेषकों ने इस बात पर असहमति जताई कि पुच एआई इतनी बड़ी परियोजना को पूरा करने में सक्षम है या नहीं. इसके चलते पोस्ट के नीचे पाठकों के इनपुट के आधार पर एक ‘कम्युनिटी नोट’ भी जोड़ा गया, जिसमें कहा गया:
‘पुच एआई एक 1 साल पुराना स्टार्टअप है, जिसकी सालाना आय 50 लाख रुपये से भी कम है. इस स्तर के एमओयू को लागू करने की इसके पास वास्तविक क्षमता नहीं है. इसके संस्थापक अक्सर वायरल विवादों के जरिए चर्चा में रहते हैं; इससे पहले उन्होंने 20 अरब डॉलर मूल्य वाली कंपनी Perplexity को खरीदने का प्रस्ताव दिया था.’
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पुच एआई की बाहरी फंडिंग की कमी, छोटी टीम और सीमित ट्रैक रिकॉर्ड की ओर भी इशारा किया.
एक दिन बाद आदित्यनाथ ने अपने ही पोस्ट को उद्धृत करते हुए लिखा: ‘इन्वेस्ट यूपी द्वारा किया गया एमओयू विस्तृत जांच-पड़ताल और परियोजना मूल्यांकन से पहले का एक प्रारंभिक कदम होता है.’
‘पुच एआई के साथ किया गया एमओयू भी एआई क्षेत्र में संभावनाओं की तलाश के लिए इन्वेस्ट यूपी द्वारा प्रक्रिया की शुरुआत मात्र है. एमओयू राज्य सरकार पर बाध्यकारी नहीं होते. आगे की कोई भी प्रगति, जिसमें सरकारी अनुमति, मंजूरी या लाइसेंस शामिल है, संभावित निवेशकों के प्रस्ताव के विस्तृत मूल्यांकन पर निर्भर करती है.’
उन्होंने लिखा, ‘जो भी संभावित निवेशक इन मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उसका एमओयू स्वतः समाप्त कर दिया जाएगा. उत्तर प्रदेश पारदर्शी, जिम्मेदार और भविष्य-केंद्रित विकास के लिए प्रतिबद्ध है.’
आदित्यनाथ की बात दोहराते हुए इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि यह एमओयू ‘गैर-बाध्यकारी’ है.
उन्होंने कहा, ‘पुच एआई ने शुक्रवार को हमें प्रस्ताव दिया था और हमने सोमवार को उनके साथ एक गैर-बाध्यकारी एमओयू पर हस्ताक्षर किए. हमने उनसे ड्यू डिलिजेंस से जुड़े दस्तावेज जमा करने को कहा है और इसके लिए उन्हें तीन दिन का समय दिया गया है. यदि वे इस प्रक्रिया में सफल होते हैं, तो हम आगे बढ़ेंगे; अन्यथा एमओयू रद्द कर दिया जाएगा.’
आनंद ने यह भी दावा किया कि 25,000 करोड़ रुपये की राशि ‘निजी निवेश’ को दर्शाती है, जिसे पुच एआई अपने निवेशकों के माध्यम से जुटाएगा.
पुच एआई के सह-संस्थापक सिद्धार्थ भाटिया ने भी स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ हुए इस एमओयू में किसी भी सार्वजनिक धन का उपयोग शामिल नहीं है.
जहां कई लोगों ने पुच एआई की आय ‘42.9 लाख रुपये’ बताई, वहीं भाटिया ने कहा कि यह ‘गूगल के एआई की एक गड़बड़ी (bug) है, जिसने पुच एआई को ‘Pucho AI’ नाम की दूसरी कंपनी के साथ मिला दिया है. 42.9 लाख रुपये की आय Pucho AI की है, पुच एआई की नहीं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘पुच एआई की आय सार्वजनिक नहीं है.’ उन्होंने यह भी बताया कि स्टार्टअप ‘अच्छी तरह से फंडेड’ है और इसका ऐप न होना एक ‘सोची-समझी रणनीति’ है.
भाटिया ने इसी महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की थी, जिसकी तस्वीरें उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर साझा कीं.
ख़बरों में यह भी कहा गया कि भाटिया के ‘चर्चा बटोरने वाले बयानों’ के इतिहास ने संदेह को और बढ़ाया. सीएनबीसी-टीवी18 के अनुसार, अगस्त 2025 में उन्होंने 50 अरब डॉलर की अनचाही पेशकश कर Perplexity AI और Google Chrome को खरीदने की बात कही थी, जबकि उस समय पुच एआई का मूल्यांकन मात्र 50 मिलियन डॉलर था.
इस सौदे में शामिल होने के इच्छुक लोगों से perplexity@puch.ai पर ईमेल करने को कहा गया था, और जो व्यक्ति Perplexity के सीईओ को मनाने में सफल होगा, उसे आईफोन देने का वादा किया गया था. यह पोस्ट वायरल हो गई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इसे एक गंभीर व्यावसायिक कदम की बजाय प्रचार का हथकंडा (publicity stunt) माना गया.