आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के तबादले, कई जिलों के कलेक्टर-एसपी बदलेंगे

मप्र में बहुप्रतिक्षित प्रशासनिक तबादले का काउंटडाउन शुरू हो गया है। अप्रैल महीने के पहले पखवाड़े में प्रदेश में बड़े स्तर पर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले होंगे। भोपाल, शिवपुरी, रीवा, धार, नर्मदापुरम, दमोह सहित कुछ अन्य जिलों के कलेक्टर बदले जा सकते हैं। इसे लेकर तैयारी भी हो चुकी है। नए वित्तीय वर्ष यानी एक अप्रैल के बाद ये तबादले होंगे। दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति को देखते हुए रोका गया है ताकि बजट के उपयोग और राजस्व प्राप्ति के जो वित्तीय लक्ष्य निर्धारित हैं, वे प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि एक जनवरी को जिन आईएएस को पदोन्नत किया गया है उनका तबादला जरूरी है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह सचिव पद पर पदोन्नत हो चुके हैं। उन्हें मंत्रालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं, कुछ अधिकारियों को तीन तो कुछ को दो-ढाई वर्ष एक जगह पर पदस्थ रहते हो चुके हैं। इनकी जगह दूसरे अधिकारी भेजने की तैयारी है। मंत्रालय में भी कुछ अधिकारियों के दायित्व में परिवर्तन संभव है। इनमें अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। उधर, पुलिस मुख्यालय ने भी मैदानी स्तर पर अधिकारियों की पदस्थापना में परिवर्तन का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जो अभी पुलिस अधीक्षक हैं और उन्हें उप पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया है।
सीएम-सीएम में चर्चा फाइनल
सूत्रों की मानें तो इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्य सचिव अनुराग जैन की चर्चा हो चुकी है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का अंतिम पखवाड़ा चल रहा है, जिसमें पूरा प्रशासनिक अमला व्यस्त है। राज्य शासन चाहता है कि मार्च के अंत में वित्तीय वर्ष की समाप्ति के चलते प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखी जाए। ऐसे में सरकार ने तय किया है कि अब मंत्रालय से लेकर मैदानी अफसरों और जिलों के कलेक्टर को वित्तीय वर्ष के शुरुआत में बदला जाए, यानि कि अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कर दी जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो राज्य शासन तकरीबन 35 से ज्यादा आईएएस अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव करेगा। इसमें राज्य शासन के कई अहम विभाग के प्रमुखों को भी बदला जा सकता है। खबर यह भी है कि इस वर्ष मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित 20 से ज्यादा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सेवानिवृत्त हो रहे है। ऐसे में सरकार प्रशासनिक बदलाव के समय इन बातों का ध्यान रखते हुए बड़े स्तर पर फैसले लेगी। जानकारों का कहना है कि राज्य शासन की संभावित फेरबदल सूची में 15 से ज्यादा जिलों के कलेक्टर के नाम है। इनमें रीवा और धार सहित दूसरे ऐसे जिलों के कलेक्टर के नाम है, जिनका एक ही जिले में कार्यकाल तीन साल से भी ज्यादा हो चुका है। सूची पर अंतिम फैसला मार्च माह के पहले सप्ताह में ही लिया जा चुका है। जिसे नवरात्रि पर्व से पहले घोषित किया जाना था, लेकिन वित्तीय वर्ष का अंतिम माह होने के वजह से प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हो, इसलिए सूची को फिलहाल मार्च में जारी नहीं करने का निर्णय लिया गया। बताया गया है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वित्त वर्ष का अंतिम समय चलने की वजह प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता टूटने की जानकारी दी। जिस पर सीएम ने सूची को अप्रैल में जारी करने पर सहमति जता दी।
बड़ी संख्या में अफसर होंगे रिटायर
जानकारी के अनुसार जिन अधिकारियों का सेवा काल इसी साल पूरा हो रहा है, उनमें माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष स्मिता भारद्वाज इसी माह यानि कि 31 अप्रैल को सेवानिवृत्त होंगी। जबकि अप्रैल माह में सचिव मप्र भवन एवं संजय कुमार, मई में केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय, जून में एमपी खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के एमडी माल सिंह भयडिय़ा, अगस्त में पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, सितंबर माह में मुख्य सचिव अनुराग जैन और चंबल संभागायुक्त सुरेश कुमार सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसी तरह अक्टूबर माह में लोकायुक्त संगठन की सचिव अरुणा गुप्ता, होम सेक्रटरी आशीष श्रीवास्तव, नवंबर में राजस्व विभाग के अपर सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे व शहडोल कमिश्नर केदार सिंह और दिसंबर माह में राजस्व मंडल के ललित दाहिमा सहित अन्य अधिकारी भी अपनी अर्ध वार्षिकी सेवाओं को पूरा करेंगे। सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार कुछ जिलों में वर्ष 2015 से 2017 बैच के आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर बना सकती है। इसी तरह बड़े विभागों की कमान ऐसे अधिकारियों को सौंपी जा सकती है, जिन्होंने अपने-अपने विभागों में बेहतर परिणाम दिए हैं। विशेषकर मैदान में ऐसे अधिकारियों को भेजा जा सकता है, जो जनता और जनप्रतिनिधियों से बेहतर संवाद कर सरकार की योजनाओ का क्रियान्वयन करा सकें। सूची फायनल करने से पहले ऐसे अधिकारियों के नामों पर मंथन किया गया और फिर सूची को सीएम के सामने रखकर अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उन्हें जानकारी दी गई।