एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव और डीजीसीए को लिखे पत्र में यात्रियों, विमान चालक दल और विमान की सुरक्षा का हवाला देते कहा है कि किसी सक्रिय युद्ध क्षेत्र के अंदर या बहुत क़रीब उड़ानें संचालित करना मानवीय जीवन को जानबूझकर ख़तरे में डालने के समान हैं.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर भारत के प्रमुख पायलट संगठन ने सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से आग्रह किया है कि खाड़ी देशों के उच्च जोखिम वाले संघर्ष क्षेत्रों में परिचालन तब तक निलंबित रखा जाए, जब तक कि एक केंद्रीकृत और आधिकारिक जोखिम मूल्यांकन नहीं हो जाता.
द टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलपीए) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव और डीजीसीए को लिखे पत्र में यात्रियों, विमान चालक दल और विमान की सुरक्षा को खतरे का हवाला देते हुए यह मांग उठाई है.
उल्लेखनीय है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते गतिरोध के चलते हवाई क्षेत्र में अक्सर बाधाएं देखी गई हैं. पायलट संघ के पत्र में तीन ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें अतीत के संघर्षों में अमेरिका, इज़रायल और ईरान जैसे युद्धरत पक्षों द्वारा नागरिक विमानों को मार गिराया गया था.
संघ के अनुसार, 1973 में इज़रायल द्वारा लीबियाई अरब एयरलाइंस फ्लाइट 114 को मार गिराया गया था, जबकि अमेरिका द्वारा ईरान एयर फ्लाइट 655 को 1988 में निशाना बनाया गया था. इसके अलावा यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस फ्लाइट 752 पर 2020 में ईरान द्वारा हमला किया गया था. उस समय तीनों देशों ने दावा किया था कि उनके द्वारा विमानों को गलती से जवाबी मिसाइल समझ लिया गया था.
अपने पत्र में पायलट संघ ने खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक एयरलाइनों द्वारा संचालित उड़ानों पर चिंता जताई है. साथ ही यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी वे इस मुद्दे को डीजीसीए के समक्ष अपने 18 मार्च को लिखे पत्र में उठा चुके हैं.
तब संगठन ने सुरक्षा उपायों पर तत्काल स्पष्टता और हाल ही में दी गई उड़ान ड्यूटी समय (एफडीटीएल) में छूट को वापस लेने की मांग की थी. इसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण विस्तारित उड़ान मार्गों के बीच बढ़ती थकान संबंधी चिंताओं का भी हवाला दिया गया था.
इसके जवाब में डीजीसीए ने 19 मार्च को एक तत्काल सुरक्षा परामर्श जारी किया था, जिसमें एयरलाइनों को अपना स्वतंत्र जोखिम मूल्यांकन करने की सलाह दी गई थी. लेकिन संघ का कहना है कि सक्रिय संघर्ष वाले क्षेत्रों में खतरों का आकलन करने के लिए उनके पास आवश्यक खुफिया जानकारी, निगरानी क्षमता या भू-राजनीतिक जोखिम-मूल्यांकन बुनियादी ढांचा नहीं है.
एएलपीए इंडिया ने पत्र में लिखा है, ‘सक्रिय युद्ध क्षेत्र में या उसके निकट उड़ानें संचालित करना यात्रियों, चालक दल और विमान की सुरक्षा के लिए एक गंभीर और अस्वीकार्य जोखिम है. हमारे विचार में ऐसे निर्णय जानबूझकर मानव जीवन को खतरे में डालने के समान हैं.’
संघ का कहना है कि इस जिम्मेदारी को अलग-अलग ऑपरेटरों को सौंपने से एक मजबूत और एकसमान सुरक्षा ढांचे के अभाव में उड़ान दल और यात्रियों को संभावित रूप से गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए पायलट संघ नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए से हस्तक्षेप करने का आग्रह करता है.
संघ ने मांग की है कि डीजीसीए तत्काल स्थिति की समीक्षा करे और केंद्रीयकृत और आधिकारिक जोखिम मूल्यांकन होने तक चिन्हित उच्च जोखिम वाले संघर्ष क्षेत्रों, खासकर बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिचालन निलंबित करे.