मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से ही होगा धार भोजशाला का फैसला, मुस्लिम पक्ष को झटका

भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे पर हस्तक्षेप से इंकार किया और मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। दरअसल, मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के सर्वेक्षण को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण के दौरान की गई वीडियोग्राफी और उस पर संबंधित पक्षों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर अंतिम निर्णय मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ही करेगा। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि हाई कोर्ट प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत वीडियोग्राफी का सूक्ष्मता से परीक्षण करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि वे अपनी चिंताओं को लेकर वापस हाई कोर्ट का रुख करें। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने इस मामले के मेरिट (गुण-दोष) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और सभी कानूनी मुद्दे हाई कोर्ट की अंतिम सुनवाई के लिए खुले रहेंगे।
समीता राजौरा बनीं चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन
राज्य शासन ने चार आईएफएस अफसरों की नई पदस्थापना की है। बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया। आदेशानुसार प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ समीता राजौरा को प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समीता राजौरा के पदभार संभालते ही वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे। वे एक महीने से यह पद संभाल रहे थे। राज्य शासन ने पीसीसीएफ अनुसंधान और विस्तार विभाष ठाकुर की सेवाएं लोक सेवा प्रबंधन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर सौंपते हुए उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन स्कूल में मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया है। पीसीसीएफ वन विकास निगम अर्चना शुक्ला को अनुसंधान और विस्तार मुख्यालय में पदस्थ किया गया है। इनके अलावा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन कमोलिका मोहन्ता को एपीसीसीएफ और एमडी राज्य लघु वनोपज संघ बनाया गया है।