अमेरिका-ईरान संघर्षविराम के 24 घंटे के भीतर ही लेबनान में इज़रायल के हमलों ने हालात बिगाड़ दिए हैं. सैकड़ों नागरिकों की मौत के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ फिर बंद कर दिया है. विरोधाभासी दावों और सैन्य तैयारियों के बीच पूरा समझौता अब गंभीर संकट में है.

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों के बीच जारी संघर्ष 41वें दिन एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. महज़ 24 घंटे पहले घोषित दो हफ्तों के संघर्षविराम पर अब संकट गहराता दिख रहा है, क्योंकि लेबनान में इज़रायल के तेज और घातक हमलों ने पूरे समझौते को अस्थिर कर दिया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ द्वारा मंगलवार सुबह घोषित इस संघर्षविराम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व की सहमति प्राप्त थी. इस समझौते के तहत ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को दीर्घकालिक समझौते के आधार के रूप में स्वीकार किया गया था और यह संघर्षविराम लेबनान तक लागू माना जा रहा था. हालांकि, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत साफ कर दिया कि वे इस व्यवस्था से बंधे नहीं हैं.
इसके बाद इज़रायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हमले तेज कर दिए. रिपोर्टों के अनुसार, महज़ एक दिन में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई. इन हमलों ने संघर्षविराम की विश्वसनीयता और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ब्रिटेन में स्पेन के दूतावास ने भी नेतन्याहू के इस कदम की कड़ी आलोचना की है. दूतावास ने कहा कि लेबनान पर इस तरह का हमला मानव जीवन और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति घोर असम्मान को दर्शाता है. उसने मांग की कि लेबनान को भी संघर्षविराम में शामिल किया जाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देनी चाहिए. साथ ही, यूरोपीय संघ से इज़रायल के साथ अपने समझौते को निलंबित करने की अपील भी की गई.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी लेबनान में इज़रायल के ‘व्यापक हमलों’ की निंदा की है. उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि इन हमलों में बड़ी संख्या में नागरिकों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, की मौत और घायल होने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई अमेरिका-ईरान संघर्षविराम के लिए ‘गंभीर खतरा’ पैदा कर रही है और सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की.
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक अंतिम समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैन्य बल ईरान में और उसके आसपास तैनात रहेंगे. उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो पहले से अधिक बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी.
ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में प्रस्तावित बातचीत ‘तर्कसंगत नहीं’ है, क्योंकि अमेरिका ने ईरान की 10 शर्तों में से कम से कम तीन का उल्लंघन किया है. उन्होंने लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमले, संघर्षविराम के बाद ईरानी हवाई क्षेत्र में कथित ड्रोन घुसपैठ और परमाणु कार्यक्रम में संवर्धन को लेकर अमेरिकी रुख पर आपत्ति जताई.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी दोहराया कि लेबनान में युद्ध को रोकना इस समझौते का हिस्सा था. हालांकि, अमेरिका और इज़रायल दोनों ने इस दावे से इनकार किया है. इसके विपरीत, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने कहा था कि संघर्षविराम ‘हर जगह, जिसमें लेबनान भी शामिल है,’ लागू होगा.
इन घटनाओं के बीच ईरान ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद कर दिया है. लेबनान में इज़रायली हमलों के जवाब में उठाए गए इस कदम ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर नए सिरे से चिंता बढ़ा दी है.
कुल मिलाकर, जहां एक ओर संघर्षविराम ने उम्मीद की एक झलक दिखाई थी, वहीं दूसरी ओर लेबनान में तेज होती हिंसा, परस्पर विरोधी दावे और सैन्य तैयारियों ने हालात को और अधिक अस्थिर बना दिया है. स्थिति इस समय बेहद नाजुक बनी हुई है.