लोकसभा में पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव दाख़िल, सत्ता के दुरुपयोग का आरोप

मोदी सरकार का संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में ख़ारिज होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्ष की आलोचना करने को लेकर कांंग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने उनके ख़िलाफ़ विशेषाधिकार नोटिस दाख़िल किया है. विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि 18 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया और सदन की अवमानना की.

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने 18 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करते हुए विपक्ष के सदस्यों पर आरोप लगाए और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया.

रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दिए अपने नोटिस में वेणुगोपाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री ‘राष्ट्रीय महत्व के एक गंभीर मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं’ और ऐसे संबोधन ‘बहुत कम होते हैं’, लेकिन संसद में हार के बाद विपक्षी दलों की आलोचना करने के लिए पीएम मोदी द्वारा राष्ट्र को संबोधित करना ‘अभूतपूर्व’ है. यह ‘विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना’ है.

उन्होंने पत्र में लिखा, ‘संसद में आवश्यक बहुमत हासिल न कर पाने के कारण प्रधानमंत्री द्वारा विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए राष्ट्र को संबोधित करना अभूतपूर्व है, जो अनैतिक और सत्ता का घोर दुरुपयोग है. देश के सर्वोच्च कार्यकारी पदाधिकारी द्वारा इस प्रकार के बयान विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​​​है.’

उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल को लोकसभा के विस्तार और व्यापक परिसीमन की राह खोलने वाला संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित नहीं हो सका था. सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से 298 ने इस बिल के समर्थन में वोट किया, वहीं 230 ने इसके विरोध में वोट किया. दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 सदस्यों का समर्थन आवश्यक था. इसके एक दिन बाद प्रधानमंत्री ने रात 8.30 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था.

मालूम हो कि इस संविधान संशोधन विधेयक का उद्देश्य विवादास्पद परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से महिला आरक्षण को ‘कार्यान्वित’ करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाना था, लेकिन यह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि विधेयक के विरुद्ध विपक्ष का मतदान न केवल महिलाओं का अपमान है, बल्कि यह ‘कन्या भ्रूण हत्या‘ के समान है.

वेणुगोपाल ने कहा कि लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 की हार पर अपने 29 मिनट के संबोधन में मोदी ने ‘विपक्ष के सदस्यों के मतदान पैटर्न पर प्रत्यक्ष टिप्पणी की उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी सवाल उठाए.

उन्होंने कहा, ‘यह सर्वविदित है कि संसद में सांसदों द्वारा दिए गए भाषणों के संबंध में उन पर आरोप लगाना, उन पर लांछन लगाना और उनके इरादों पर सवाल उठाना विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​के बराबर है.’

वेणुगोपाल ने आगे लिखा कि 16 और 17 अप्रैल को विपक्षी दलों के सदस्यों ने ‘स्पष्ट रूप से कहा था कि वे लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण का सर्वसम्मति से समर्थन करते हैं.’

‘इस संदर्भ में संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम 2023 को संसद के दोनों सदनों ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित कर दिया था. असल में विपक्ष ने विशेष रूप से मांग की थी कि लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण को संविधान और अन्य वैधानिक प्रावधानों में उल्लिखित सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तत्काल लागू किया जाए. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की आड़ में चुपके से संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन करने का प्रयास किया गया है.’

वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्षी सदस्य केवल इन चिंताओं को उठा रहे हैं और यह संसदीय परंपरा और प्रत्येक सदस्य का मौलिक विशेषाधिकार है कि प्रधानमंत्री सहित कोई भी व्यक्ति सदन में किसी भी सदस्य के आचरण या मतदान पर टिप्पणी नहीं करेगा या ऐसे आचरण को किसी उद्देश्य से नहीं जोड़ेगा.

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की कोई भी टिप्पणी या आरोप सदन की गरिमा और अधिकार को सीधे तौर पर ठेस पहुंचाती है और इसके सदस्यों द्वारा संसदीय कर्तव्यों के स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वहन में बाधा डालती है.

वेणुगोपाल के अनुसार, आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के अलावा प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय टेलीविजन (लोकसेवा प्रसारक) पर दिया गया भाषण सदन और विपक्ष के प्रत्येक सदस्य के विशेषाधिकार का स्पष्ट और गंभीर उल्लंघन है.