ओडिशा: मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा शख़्स, खाते से पैसे निकालने के लिए मांगा जा रहा था प्रमाण

घटना क्योंझर ज़िले के ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा में हुई. जीतू मुंडा नामक एक शख़्स अपनी बड़ी बहन, जो इस साल जनवरी में गुज़र चुकी हैं, के बैंक खाते से 20,000 रुपये निकालना चाहते थे. उनका कहना है कि वह बैंक वालों को कई बार बता चुके थे कि उनकी बहन की मौत हो चुकी है, लेकिन वे उन्हें बैंक लाने पर ज़ोर देते रहे. इसलिए मजबूरी में कब्र खोदकर उनका कंकाल सबूत के तौर पर बैंक लाना पड़ा.

नई दिल्ली: ओडिशा के क्योंझर ज़िले में सोमवार (27 अप्रैल) को एक आदिवासी शख्स अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा, ताकि उनके नाम पर जमा पैसे निकाल सके.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह घटना क्योंझर जिले के पटना ब्लॉक में स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा में हुई. उस व्यक्ति की पहचान दियानाली गांव के जीतू मुंडा (50) के रूप में हुई. वह अपनी बड़ी बहन, कालरा मुंडा (56) के बैंक खाते से 20,000 रुपये निकालना चाहता था, जिनकी मौत 26 जनवरी, 2026 को हो गई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जीतू मुंडा ने कंकाल के साथ ग्रामीण बैंक के सामने प्रदर्शन किया. बैंक के अधिकारी कंकाल देखकर डर गए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी.

बताया गया है कि जीतू मुंडा साक्षर नहीं हैं. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मैं कई बार बैंक गया, लेकिन वहां के लोगों ने कहा कि पैसे निकालने के लिए खाताधारक को साथ लाओ. मैंने उन्हें बताया कि मेरी बहन की मौत हो चुकी है, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी और उन्हें साथ में बैंक लाने पर जोर देते रहे. इसलिए मजबूरी में मैंने कब्र खोदकर उनका कंकाल निकालकर सबूत के तौर पर बैंक लाया.’

पीटीआई के अनुसार, पटना पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक (आईआईसी) किरण प्रसाद साहू, जो सूचना मिलने पर बैंक पहुंचे थे, ने कहा, ‘जीतू पढ़े-लिखे नहीं हैं. उन्हें नहीं पता कि कानूनी वारिस या नॉमिनी कौन होता है. बैंक अधिकारी उन्हें मृत व्यक्ति के खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया को सही तरीके से समझाने में नाकाम रहे.’

पुलिस के अनुसार, जीतू की बहन की मौत के बाद उनके खाते से रकम निकालने के लिए बैंक गए थे. लेकिन बैंक अधिकारियों ने पैसे देने से मना कर दिया, क्योंकि खाता उनकी बहन के नाम पर था. बैंक अधिकारी ने उनसे कहा कि रकम निकालने के लिए वह मौत का सबूत (मृत्यु प्रमाणपत्र) और दूसरे दस्तावेज़ लेकर आए. जीतू यह बात समझ नहीं पाए.

हालांकि, इस घटना के बाद पुलिस ने जीतू मुंडा को आश्वासन दिया कि वे उनकी मृत बहन के खाते से पैसे निकलवाने में मदद करेंगे. बाद में पुलिस की मौजूदगी में कंकाल को फिर से कब्रिस्तान में दफना दिया गया.

इस बीच, स्थानीय ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) मानस दंडपट ने कहा कि स्वर्गीय कालरा मुंडा के कानूनी वारिस के संबंध में किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया था. बीडीओ ने कहा, ‘मुझे आज ही इस बारे में पता चला. हम देखेंगे कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए क्या किया जा सकता है.’

इस बीच, बैंक सूत्रों ने बताया है कि कालरा मुंडा के बैंक खाते में जो नॉमिनी था, उनकी भी मृत्यु हो चुकी है. इसलिए, उनके नाम पर जमा पैसों पर दावा करने वाला एकमात्र व्यक्ति जीतू मुंडा ही थे.

स्थानीय प्रशासन ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आवश्यक व्यवस्था करें और यह सुनिश्चित करें कि जीतू मुंडा – जो नियमों के अनुसार एकमात्र दावेदार हैं – को जल्द से जल्द राशि मिल जाए.