ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों के 60वें दिन तनाव बरक़रार है, हालांकि कूटनीतिक हलचल तेज़ हुई है. ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची रूस पहुंचे और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को समर्थन के लिए आभार जताया. दूसरी तरफ, ईरान के नए शांति प्रस्ताव पर ट्रंप की नाराज़गी की ख़बरें सामने आई हैं.

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के 60वें दिन पश्चिम एशिया में तनाव कई मोर्चों पर बना हुआ है. एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘नेशनल सिक्योरिटी टीम’ ईरान की ओर से आए एक शांति प्रस्ताव पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर गहराता जा रहा है.
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने युद्ध रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिलहाल टालने की बात कही है. बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन ट्रंप इससे संतुष्ट नहीं हैं.
रॉयटर्स और अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप चाहते हैं कि बातचीत की शुरुआत ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम से हो. द न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ कहा कि मौजूदा प्रस्ताव उन्हें स्वीकार्य नहीं है.
रूस पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने रूस के समर्थन के लिए आभार जताया. उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान अमेरिका के उस अनुरोध पर विचार कर रहा है, जिसमें वार्ता दोबारा शुरू करने की बात कही गई है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने से दुनिया चिंतित
दुनिया के कई देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को तत्काल और बिना रुकावट खोले जाने की मांग की है. यूनाइटेड नेशंस के महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान टकराव अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो वैश्विक खाद्य संकट पैदा हो सकता है.
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही इसी समुद्री रास्ते से होती है. इसके बंद होने से खासतौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र प्रभावित हुआ है.
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने जापान दौरे के दौरान कहा कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ईंधन आपूर्ति बाधित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बेनतीजा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में भी कोई ठोस फैसला नहीं हो सका. सदस्य देशों ने तनाव कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ खोलने की अपील की, लेकिन परिषद किसी सामूहिक कार्रवाई पर सहमत नहीं हो पाई.
रिपोर्ट के अनुसार, हजारों मालवाहक जहाज़ और बड़ी संख्या में नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं. इससे ईंधन कीमतों में तेजी और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव की आशंका बढ़ गई है.
तनाव के बीच तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.4 प्रतिशत बढ़कर 108.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. यह बढ़त ईरान-अमेरिका वार्ता में ठहराव और समुद्री संकट के कारण देखी जा रही है.
लेबनान में इज़रायली हमले जारी
इसी बीच लेबनान मोर्चे पर भी हालात सामान्य नहीं हैं. इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच लगातार हमले जारी हैं.
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के मुताबिक, इज़रायली सेना ने बिंत जुबैल शहर के अल-मिहनिया इलाके पर भारी मशीनगनों से गोलाबारी की. इसके अलावा ज़वतार अल-शरकिया कस्बे पर सुबह से तीन हवाई हमले किए गए.
17 अप्रैल को घोषित युद्धविराम के बाद से अब तक इज़रायली हमलों में कम से कम 40 लोगों की मौत हो चुकी है.
वहीं, इज़रायली सेना ने दावा किया है कि दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ड्रोन हमले में उसके दो सैनिक घायल हुए हैं. इनमें एक की हालत गंभीर बताई गई है.
ईरान में स्कूल अभी बंद रहेंगे
ईरान के शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल स्कूलों में नियमित कक्षाएं दोबारा शुरू करने की कोई योजना नहीं है. कुछ स्कूलों ने आंतरिक परीक्षाएं ऑफलाइन कराने की घोषणा की थी, लेकिन मंत्रालय ने कहा कि ऐसा निर्णय संबंधित अधिकारियों की अनुमति पर निर्भर करेगा.
समुद्री नाकेबंदी भी जारी
अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने 26 अप्रैल को ईरानी झंडे वाले टैंकर एम/टी स्ट्रीम को ईरानी बंदरगाह पहुंचने से रोका. इससे संकेत मिलता है कि समुद्री नाकेबंदी अब भी जारी है.
पश्चिम एशिया में जारी यह संकट अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गया है. ऊर्जा, व्यापार, खाद्य आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता, सभी पर इसके गंभीर असर दिखाई देने लगे हैं.