हैंडपंप लगाने से पहले जमीन का होगा वैज्ञानिक परीक्षण

भोपाल/मंगल भारत। मप्र में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। इस

कारण गर्मियों में कई जिलों में हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। इसकी वजह यह है कि बिना जांच-परख के हैंडपंप लगा दिए जाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने एक नई एसओपी तैयार की है। इस एसओपी में यह भी तय कर दिया गया है कि नए हैंडपंप लगाने से पहले जमीन का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाएगा, ताकि यह पहले ही पता चल जाए कि जमीन के नीचे पानी का स्तर क्या है और वहां हैंडपंप लगाने से पानी निकलेगा या नहीं। इसके लिए जियो-हाइड्रोलॉजिकल सर्वे कराया जाएगा। यदि सर्वे की रिपोर्ट नेगेटिव आएगी तो हैंडपंप लगाने के बजाय जलापूर्ति के लिए दूसरे उपाय किए जाएंगे।
गौरतलब है कि अभी प्रदेश के गांवों में लोगों की मांग या जनप्रतिनिधियों के कहने पर हैंडपंप लगा दिया जाता है। लेकिन अब प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया पूरी तरह बदलने जा रही है। अब किसी भी गांव में केवल मांग होने या जनप्रतिनिधियों के कहने पर हैंडपंप नहीं लगा दिया जाएगा, बल्कि विभाग पहले यह जांच करेगा कि वहां वास्तव में इसकी जरूरत है या नहीं। इस बदलाव के लिए पीएचई ने एक नई एसओपी तैयार की है। एसओपी में हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को तीन चरणों में बांट दिया गया है। सबसे पहले ग्राम पंचायत की मांग पर ब्लॉक स्तर के अधिकारी तीन दिन के भीतर मौके का मुआयना करेंगे। इसके बाद कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी इसकी मंजूरी देगी। निर्माण के दौरान पानी की शुद्धता की जांच तय मानकों के आधार पर होगी और चबूतरा निर्माण से लेकर जल निकासी तक के काम पूरे होने के बाद ही इसे ग्राम पंचायत को सौंपा जाएगा। पंचायत ही इसके रखरखाव की अंतिम जिम्मेदारी संभालेगी।
पेयजल व्यवस्था होगी सुनिश्चित
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार, हैंडपंप लगाने की इस पूरी कवायद का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जरूरत और गुणवत्ता के आधार पर पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करना है। पीएचई की नई एसओपी लागू होने से सरकारी पैसे और पानी दोनों की बर्बादी रोकी जा सकेगी। इससे पहले पीएचई द्वारा हैंडपंप को लिए कराए गए बोर अक्सर फेल हो जाते थे, लेकिन इसकी स्थापना का भारी-भरकम खर्च विभाग को ही चुकाना पड़ता था। सरकार ने अब यह भी साफ कर दिया है कि जिन गांवों में पहले से ही जल जीवन मिशन के जरिए नलों से पानी मिल रहा है, वहां अब नया हैंडपंप नहीं लगाया जाएगा। नियम के मुताबिक यदि किसी इलाके के 300 मीटर के दायरे में प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी पहले से मिल रहा है, तो वहां नए हैंडपंप की मंजूरी नहीं मिलेगी। नई व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म घन भी तैयार किया गया है। इस पोर्टल पर हर हैंडपंप की लोकेशन और उसकी पूरी जानकारी इस पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी, जिससे उनकी निगरानी करना आसान होगा