रामपुर नैकिन अस्पताल में 15 सालों से जमा ‘महा-लेखापाल’, बीएमओ भी नतमस्तक!.

मंगल भारत.रामपुर नैकिन :15 वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे एकाउंटेंट के आगे बेबस हुए खंड चिकित्सा अधिकारी!• राष्ट्रपति तक पहुँचे भ्रष्टाचार के खेल में वित्तीय लेन-देन और मलाईदार सिंडिकेट का बड़ा खुलासा.

रामपुर नैकिन (सीधी)।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) रामपुर नैकिन में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुँचे इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब एक ऐसा चौंकाने वाला मोड़ आया है, जिसने पूरे जिला स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पिछले 15 वर्षों से एक ही मलाईदार सीट पर जमे एक रसूखदार लेखापाल (Accountant) का ऐसा आतंक है कि वर्तमान खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) भी उनके सामने बात करने या कोई नियम लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।15 साल से एक ही संवेदनशील पद पर कब्ज़ा, नियमों की उड़ी धज्जियांशासकीय सेवा नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी या अधिकारी का एक ही स्थान पर तीन से तीन से पांच वर्ष से अधिक समय तक पदस्थ रहना संदेहास्पद माना जाता है, विशेषकर वित्तीय और लेखा जैसे संवेदनशील विभागों में। लेकिन रामपुर नैकिन अस्पताल में नियमों को ठेंगा दिखाते हुए यह ‘महा-लेखापाल’ पिछले डेढ़ दशक से अपनी जड़ें जमाए बैठा है। आरोप है कि इतने लंबे समय में इस कर्मचारी ने अस्पताल के बजट, रख-रखाव फंड और विभिन्न योजनाओं की राशि में कथित तौर पर ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे भेद पाना किसी के बस की बात नहीं रही।बीएमओ भी बेबस, आखिर किसका है वरदहस्त?क्षेत्रीय जनता और अस्पताल से जुड़े सूत्रों का दावा है कि वर्तमान बीएमओ (BMO) भी इस रसूखदार लेखापाल के आगे पूरी तरह नतमस्तक और बेबस नजर आते हैं। वह लेखापाल से किसी भी गड़बड़ी पर सीधी बात करने या स्पष्टीकरण मांगने की स्थिति में भी नहीं हैं। चर्चा यह भी है कि इस कर्मचारी को भोपाल और जिला स्तर के बड़े सफेदपोश नेताओं और रसूखदारों का सीधा संरक्षण प्राप्त है। इसी राजनैतिक रसूख के दम पर यह कर्मचारी बीएमओ सहित पूरे अस्पताल प्रशासन को अपनी उंगलियों पर नचा रहा है।जनता का फूटा गुस्सा: ‘अस्पताल को बना दिया निजी जागीर’इस तानाशाही और वर्षों पुराने सिंडिकेट के कारण रामपुर नैकिन की गरीब जनता बुनियादी इलाज, सरकारी दवाइयों और स्वास्थ्य लाभ के लिए तरस रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और सालों-साल एक ही व्यक्ति सरकारी पैसों का हिसाब-किताब अपने हिसाब से चलाए, तो अस्पताल का कबाड़ होना तय है। इसी तानाशाही और अरबों के कथित घालमेल से तंग आकर अब क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने महामहिम राष्ट्रपति से इस 15 वर्षीय ‘कुर्सी-मोह’ और भ्रष्टाचार के गठजोड़ की उच्च स्तरीय आर्थिक जांच (Financial Audit) कराने की मांग की है।