लोक संस्कृति और बाजारवाद पर समीक्षकों ने किया विचार मंथन’

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लोक संस्कृति और बाजारवाद पर समीक्षकों ने किया विचार मंथन’
कला वार्ता में शामिल हुए कई प्रदेशों के समीक्षक
सीधी ब्यूरो राम बिहारी पांडे
मंगल भारत सीधी:–  सीधी लोक रंग महोत्सव 2018 के द्वितीय दिवस लोक संस्कृति और बाजारवाद पर कलावार्ता का आयोजन स्थानीय मानस भवन में किया गया। कलावार्ता में कई प्रदेशो के समीक्षकों ने भागीदारी करते हुए बढ़ते बाजारवाद को नियंत्रित करने पर जोर दिया।
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समीक्षक मनोज मिश्रा, रंगकर्मी एवं समीक्षक प्रवीण गुजंन बेगू सराय बिहार, समीक्षक संतोष त्रिवेदी, एवं कला समीक्षक प्रो.सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि बाजारवाद के चलते आज लोक संस्कृति के अस्तित्व मडराने लगा है। बाजारवाद के विस्तृत दायरे ने लोक कलाओं को भी अपनी चपेट में ले लिया है। जो निश्चित ही काफी चिंता की बात है। लोक संस्कृति ग्रामीण परिवेश में पनपती है। किंतु आज बाजारवाद के चलते लोक कलाकारों की प्रतिभा खत्म होती जा रही है।  बाजारवाद के चलते जो लोक कलाकार मंच में नियमित रूप से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते है। किंतु पर्याप्त वेतन न होने के कारण लोक कलाकारों को आर्थिक तंगी के दौर से गुजरना पड़ता है। कुछ वर्ष पहले तक कलाकारों की प्रतिभा के चलते भारत विश्व गुरू बनेगा का जो सपना दिख रहा था वह अब धूमिल पड़ता जा रहा है।
सीधी से शुरू हुआ भागीरथी प्रयासः केदारनाथ
स्थानीय विधायक पं केदारनाथ शुक्ल ने लोक संस्कृति और बाजारवाद की कलावार्ता में अपनी सहभागिता प्रदर्शित करते हुए कहा कि लोक संस्कृति और संस्कृती समाज में हमेशा से विद्यमान रही है। यह अवश्य है कि बदलते परिवेश में लोक संस्कृति लोप हो रही है जिसके संरक्षण का काम भी शुरू हो चुका है। सीधी से इन्द्रवती नाट्य समिति द्वारा लोक कला के संरक्षण के लिए भागीरथी प्रयास शुरू किया गया है। जिसमें देश भर के कलाकार एवं विचारक मंच साझा कर लोक कलाओं को संरक्षित करने की दिशा में प्रयास कर रहे है। जो निश्चित ही काफी सराहनीय है। अब सरस्वती के साधकों के ऊपर बाजारवाद को अनुकूल बनाने की महती जिम्मेदारी है।