22 दिन बाद भी पुलिस आयुक्त प्रणाली के अनुरूप मैदानी अमला नहीं

  • अमले की कमी के कारण पुलिस की मैदानी सक्रियता ने नहीं पकड़ा जोर


  • भोपाल/ मंंगल भारत।मनीष द्विवेदी.
    राजधानी में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद भी पुलिस की मैदानी सक्रियता जस की तस है। इसकी वजह यह है कि सरकार ने पुलिस आयुक्त प्रणाली के अनुरूप आला अफसरों की पदस्थापना तो कर दी लेकिन मैदानी अमला अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। जानकारी के अनुसार राजधानी पुलिस के पास जो अमला था उसमें से भी कई जवानों को अफसरों के यहां तैनात कर दिया गया है। ऐसे में मैदानी अमले की और कमी हो गई है।
    गौरतलब है कि भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त प्रणाली 9 दिसंबर को लागू हुई थी और अगले दिन यानी 10 दिसंबर को पुलिस कमिश्नर की पदस्थापना कर दी गई थी। पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हुए तकरीबन 22 दिन से ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन अभी तक पूरी व्यवस्था ढर्रे पर नहीं आई है। आयुक्त प्रणाली में सबसे ज्यादा दिक्कत मैदानी अमले की कमी से हो रही है। वजह साफ है कि आला अफसरों के पद तो बढ़ाए गए हैं, लेकिन निचला अमला अलग से स्वीकृत नहीं किया गया है। अब स्थिति यह है कि जो भी निचला अमला मैदान में रहता है, उनमें से डेढ़ सौ के करीब अमला अफसरों के स्टाफ में पदस्थ कर दिया जाएगा। ऐसे में मैदान में अमले की और कमी हो जाएगी।
    देहात के लिए अभी तक कोई अलग व्यवस्था
    राजधानी में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद देहात के नाम से जिला तो बना दिया गया है, लेकिन वहां पर अभी तक कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई है। देहात के जिले में आरआई तक की पदस्थापना नहीं की गई है। अभी शहर से लेकर देहात तक की पूरी जिम्मेदारी एक आरआई के पास है। बताते हैं कि अभी अफसरों को स्टेनों तक नहीं मिल रहे हैं। बताते हैं कि जिले में स्टेनों की संख्या भी कम है। अब चूंकि अफसरों को ऑफिस के साथ अदालती प्रक्रिया की कार्रवाई भी पूरी करनी है, लिहाजा स्टेनों और स्टाफ की दरकार तो होगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह संख्या कैसे पूरी होगी। निचले अमले का अलग से कोई पद स्वीकृत नहीं किया गया है सामान्य तौर पर व्यवस्था यह होती है कि पदों का सृजन नीचे से ऊपर तक एक अनुपात में होता है।
    आला अफसर बढ़े …अमला पुराना
    आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद आला अफसरों के जितने पद स्वीकृत हुए थे, उनमें ट्रैफिक एएसपी को छोड़कर अन्य पद तकरीबन भर गए हैं। भोपाल में एक एडीशनल कमिश्नर का पद भी रिक्त है। भोपाल में पहले आईजी, डीआईजी और तीन एसपी की तैनाती होती थी। पुरानी पदस्थापना में आईपीएस अफसरों की संख्या पांच होती थी। अब कमिश्नर, दो एडिशनल कमिश्नर के सात आठ डिप्टी पुलिस कमिश्नर बनाए गए हैं। पहले की तुलना में आईपीएस अफसरों की संख्या पहले से दोगुनी हो गई है। आईजी देहात और एसपी देहात के पद पर की गई तैनाती अलग है। एएसपी के पद भी बढ़ाए गए हैं। पुरानी स्थिति के हिसाब से करीब एक दर्जन से अधिक आला अफसर बढ़े हैं और स्वीकृत अमला पुराना है। कमोबेश यही स्थिति इंदौर की है। मौजूदा व्यवस्था के लिहाजा से एक आला अफसर के स्टाफ में ड्राइवर, गनमैन, रीडर, पीए, अर्दली को मिलाकर 10 से 15 अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। उस हिसाब से यह संख्या डेढ़ सौ के पार पहुंचती है।