49 जिलों को एक साल और करना होगा हर घर में नल से जल का इंतजार

भोपाल/मंगल भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लैगशिप


योजना में शामिल जल जीवन मिशन को प्रदेश के अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह से करीब चार साल में प्रदेश का महज एक जिला ही इस योजना के तहत शत- प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर सका है। अफसरों की लापरवाही इससे ही समझी जा सकती है कि जिस गति से काम चल रहा है उससे यह तय है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले महज दो और जिले ही इस लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे। ऐसे में प्रदेश में इस योजना क तय समय सीमा में क्रियान्वित होना मुश्किल लग रहा है। दरअसल इसके लिए अगले साल तक की अवधि तय है। इस योजना में मप्र का बुरहानपुर जिला देश का ऐसा पहला जिला बीते साल ही बन गया था, जहां पर सबसे पहले इस योजना का शत -प्रतिशत क्रियान्वयन किया गया था। इस उपलब्धि पर बुरहानपुर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुरस्कृत भी कर चुके हैं। इसके बाद अब निवाड़ी जिला इस उपलब्धि को हासिल करने वाला प्रदेश का दूसरा जिला बनने जा रहा है। इस जिले में योजना का काम लगभग अंतिम चरण मे है। माना जा रहा है कि अगले माह में निवाड़ी जिले के हर घर में नल से पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी। सरकार चुनाव से पहले इस योजना का पूरी तरह से इंदौर में भी क्रियान्वयन चाहती है। यही वजह है कि इसके लिए युद्वस्तर पर काम किया जा रहा है। विभाग ने जुलाई के आखिर तक पूरे इंदौर जिले में नल से जल की सप्लाई करने का लक्ष्य तय किया हुआ है। इसकी वजह से माना जा रहा है कि, प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के 52 जिलों में से महज तीन में ही शत-प्रतिशत घरों में नल से पानी पहुंचाया जा सकेगा। शेष 49 जिलों के हर घर को पानी पाने के लिए अगले साल तक का इंतजार करना होगा। हालांकि इस योजना के मामले में पीएचई विभाग के अफसरों का कहना है कि अधिकांश जिलों में इसका काम 80 से 90 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। अब काम में देरी की वजह है कुछ तकनीकी वजहें। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में करीब 55 हजार गांव हैं। इस योजना के शुरू होते समय प्रदेश में महज दस फीसदी घरों में ही नलों से पानी की सप्लाई हो रही थी। अब सरकार के सामने दो साल में ग्रामीण क्षेत्र के हर घर में नल से पानी सप्लाई करने का बड़ा लक्ष्य है। पीएचई विभाग के अफसरों का कहना है कि मिशन मोड में काम करने की वजह से तय समय सीमा में लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
2019 में की गई थी शुरु
मप्र समेत देश के अन्य राज्यों के गांवों में लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ता है। इससे सबसे ज्यादा महिलाएं परेशान होती हैं, उन्हें हैंडपंप, कुओं, तालाबों से लंबी दूरी तय कर पानी ढोना पड़ता है। गांवों में जल संकट को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य पूरे देश के एक-एक गांव में घर-घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना है। मप्र में जल जीवन मिशन में हर गांव में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए करीब 42 हजार 643 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा रही है।