ईरान पर हमलों के 52वें दिन अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरानी जहाज़ जब्त करने का दावा किया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है. प्रस्तावित वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि ईरान ने अमेरिका की नीयत पर सवाल उठाए हैं और तेल बाजार को लेकर चेतावनी दी है.

ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के 52वें दिन हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं. सैन्य टकराव के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी अनिश्चितता बढ़ती दिख रही है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज़ को जब्त कर लिया है. ट्रंप के मुताबिक, ओमान की खाड़ी में तैनात अमेरिकी युद्धपोत ने जहाज़ को रोकने के लिए उसके इंजन रूम को निशाना बनाया, जिसके बाद अमेरिकी मरीन ने उस पर कब्जा कर लिया. जहाज़ का नाम ‘टौस्का’ बताया गया है और उसमें मौजूद सामान की जांच की जा रही है. यह कार्रवाई उस समय हुई है जब अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने का दावा किया था.
इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीदों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिकी प्रतिनिधि पाकिस्तान में ईरान के साथ बातचीत के लिए जाने वाले हैं, जिससे बुधवार को समाप्त होने वाले संघर्षविराम को आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही थी. हालांकि, ईरान ने इस बातचीत में शामिल होने की कोई पुष्टि नहीं की है.
ईरान की ओर से भी कड़े संकेत मिले हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत में कहा कि वार्ता के दौरान अमेरिका की शर्तें और ईरानी जहाज़ों व बंदरगाहों को लेकर दी जा रही धमकियां उसके ‘असली इरादों’ को उजागर करती हैं और यह दिखाती हैं कि वह कूटनीति को लेकर गंभीर नहीं है.
ईरानी सरकारी मीडिया में भी संकेत दिए गए हैं कि इस हफ्ते प्रस्तावित बातचीत शायद न हो. हालांकि इन रिपोर्टों में आधिकारिक तौर पर किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ गया है.
इस बीच, ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ ने तेल बाजार को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ईरानी तेल निर्यात पर आर्थिक और सैन्य दबाव जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक ईंधन कीमतों पर पड़ेगा. उनके मुताबिक, ‘ईरान के तेल निर्यात को सीमित रखते हुए दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना संभव नहीं है. या तो सभी के लिए तेल बाजार खुला होगा, या फिर इसकी कीमत सभी को चुकानी पड़ेगी.’
जमीनी स्तर पर इस टकराव की मानवीय कीमत भी लगातार बढ़ रही है. अब तक ईरान में कम से कम 3,000 लोगों की मौत की खबर है, जबकि लेबनान में यह संख्या करीब 2,300 पहुंच चुकी है. इज़रायल में 23 नागरिकों और 15 सैनिकों की जान गई है, वहीं खाड़ी के अरब देशों में भी एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई है. इस संघर्ष में 13 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है.
कुल मिलाकर, एक ओर सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है, तो दूसरी ओर बातचीत की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं. ऐसे में यह संघर्ष और अधिक व्यापक और अस्थिर रूप लेने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है.