सुप्रीम कोर्ट एक हेट क्राइम केस पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जुलाई 2021 में उन पर दाढ़ी और कथित मुस्लिम पहचान के कारण हमला किया गया. इसे लेकर अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि उसका जांच अधिकारी शीर्ष अदालत के साथ लुका-छिपी क्यों खेल रहे हैं.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि उसका जांच अधिकारी (आईओ) शीर्ष अदालत के साथ ‘लुका-छिपी’ क्यों खेल रहा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने ये टिप्पणियां एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं. इस याचिका में एक वरिष्ठ नागरिक की शिकायत पर निष्पक्ष जांच और ट्रायल की मांग की गई थी. वरिष्ठ नागरिक ने दावा किया था कि जुलाई 2021 में नोएडा में एक कथित हेट क्राइम में उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा, ‘आपका जांच अधिकारी इस अदालत के साथ लुका-छिपी क्यों खेल रहा है?’ साथ ही यह भी सवाल किया कि केस में आईपीसी की धारा 153-B क्यों नहीं जोड़ी गई. पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-बी राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप लगाने या बयान देने के अपराध से संबंधित है.
अखबार के अनुसार, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन पर ‘दाढ़ी और कथित मुस्लिम पहचान’ के कारण हमला किया गया.
अदालत ने उत्तर प्रदेश की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा कि पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 153-बी क्यों नहीं जोड़ी.
नटराज ने कोर्ट में बताया कि ट्रायल कोर्ट ने पुलिस को केस में आगे की जांच करने की इजाज़त दे दी है और पुलिस ज़रूरी धाराएं जोड़ देगी.
अदालत ने कहा, ‘प्रतिवादी द्वारा दायर अनुपालन हलफनामे से हम संतुष्ट नहीं हैं. अपने अधिकारियों को समझाइए, नहीं तो वे मुश्किल में पड़ जाएंगे. हमें उन्हें बुलाकर फटकार लगाने में कोई खुशी नहीं होती.’
पीठ ने कहा कि वह जांच अधिकारी को तलब करने के पक्ष में थी, लेकिन नटराज के अनुरोध पर उसने पूरी तरह से नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया. मामले की अगली सुनवाई 19 मई को तय की गई.
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि 4 जुलाई, 2021 को नोएडा में वह ‘घिनौने हेट क्राइम’ का शिकार हुए थे, जब लोगों के एक समूह ने उनके साथ ‘गाली-गलौज की, मारपीट की और सुनियोजित तरीके से उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई.’
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उन पर हमला किया गया और उनकी ‘धार्मिक पहचान’ को लेकर अपमानजनक शब्द कहे गए.