बेंगलुरु: भारी बारिश के बीच सरकारी अस्पताल की दीवार गिरने से सात लोगों की मौत, कई घायल

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बुधवार (29 अप्रैल) को भारी बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के बीच बाउरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल की चारदीवारी गिरने से सात लोगों की मौत हो गई. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है.

नई दिल्ली: बेंगलुरु में बुधवार (29 अप्रैल) को भारी बारिश के बीच सरकारी बाउरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल के परिसर के पास एक चारदीवारी गिरने से सात लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने, घायलों के लिए मुफ्त इलाज और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की घोषणा की है.

इस मामले से जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने अखबार को बताया कि यह घटना बुधवार शाम करीब 5:30 बजे मध्य बेंगलुरु के शिवाजीनगर में घटी, जब अचानक तेज बारिश, गरज और बिजली के साथ बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में मौसम का कहर देखा गया.

भारी बारिश और ओलावृष्टि ने शहर की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. यहां बुधवार शाम 5:30 बजे तक शहर में 78.0 मिमी बारिश दर्ज की गई.

घटना के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘बाउरिंग अस्पताल परिसर के पास हुई दीवार गिरने की दुखद घटना में सात लोगों की मौत की पुष्टि की गई है.’

उल्लेखनीय है कि शहर के सबसे पुराने सरकारी संस्थानों में से एक यह अस्पताल घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है, जहां इसके आसपास विशेष रूप से परिसर से सटे फुटपाथों के पास रेडी पटरी और छोटे-मोटे सामान की अस्थाई दुकानें संचालित होती हैं.

जानकारी के अनुसार, विक्रेताओं ने अस्पताल के मुर्दाघर के पास सड़क के दोनों किनारों पर स्टॉल लगा रखे थे, जिनमें चादरें, फल और बच्चों के खिलौने जैसी चीजें बेची जा रही थीं. बारिश तेज होने पर कई दुकानदार अपने सामान की सुरक्षा के लिए वहीं डटे रहे, जबकि इलाके से गुजरने वाले अन्य लोगों ने भी दीवार के सहारे शरण ली.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना से कुछ ही क्षण पहले लोग दीवार के सहारे लगी तिरपाल के नीचे बारिश से बचने के लिए जमा हुए थे.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘बारिश बहुत तेज थी और हवाएं भी ज़ोरों से चल रही थीं. लोग दीवार के पास शरण लेने के लिए दौड़े. कुछ ही क्षण में दीवार गिर पड़ी.’

आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासियों और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया और मलबे से लोगों को बाहर निकाला. कई घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया.

सख्त कार्रवाई की जाएगी: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शाम को घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा, ‘हम जांच करेंगे और यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’

बुधवार को बाद में जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसर की दीवार के अंदर निर्माण कार्य चल रहा था और ठेकेदार मिट्टी डालने का काम कर रहा था.

उन्होंने आगे कहा, ‘प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह दीवार मिट्टी के दबाव के कारण ढह गई है. इसलिए मैंने इंजीनियरों (कार्यकारी इंजीनियर और सहायक कार्यकारी इंजीनियर) से पूछा है कि क्या उन्होंने यह जांच की थी कि दीवार कमजोर हुई थी या नहीं.’

मुख्यमंत्री ने संरचना की स्थिति और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर भी अधिकारियों से सवाल किए, ‘आपने क्या कार्रवाई की है? क्या आप एक पुरानी दीवार का भी निरीक्षण नहीं कर सकते थे? क्या आप लोगों के बीच कोई समन्वय नहीं है? यदि आप सतर्क होते, तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था.’
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने अपनी बैठक बीच में ही रोक दी और घटनास्थल का दौरा किया.

विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्ष के नेता आर अशोक ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस घटना को टाला जा सकता था.

उन्होंने कहा, ‘निर्दोष लोगों की जान जाना महज एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह घोर प्रशासनिक लापरवाही से उपजे राज्य प्रायोजित आपदा का परिणाम है.’

उन्होंने आगे कहा कि सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

बारिश से जन जीवन अस्तव्यस्त

बेंगलुरु में बुधवार शाम को भारी बारिश के बाद करीब 750 झुग्गी-झोपड़ियां जलमग्न हो गईं, जिससे यहां रहने वाले परिवारों को रात सड़क पर बिताने को मजबूर होना पड़ा.

यहां काम कर रहे स्वयंसेवकों ने बताया कि विनोभा नगर में कम से कम 300 घर और मैसूर रोड के पास नरसिम्हाया कॉलोनी में 130 घर प्रभावित हुए हैं.

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वे कई सालों से अधिकारियों को इन मुद्दों के बारे में सूचित करते आ रहे हैं, लेकिन इसे लेकर कुछ किया नहीं जा रहा.

इन लोगों ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि बरसात के मौसम में प्रभावित घरों वाले लोगों को आश्रय देने के लिए इन क्षेत्रों के आसपास के सामुदायिक सभागारों और सरकारी स्कूलों को खोल दिया जाए, जिससे यह लोग वहां शरण ले सकें.