यूपी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लंबित मामलों के लिए राज्य सरकार और पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराया

हत्या के एक मामले में ज़मानत अर्ज़ी की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ज़िला अदालतों में बड़ी संख्या में आपराधिक मामलों के लंबित होने के लिए सिर्फ़ न्यायिक अधिकारी ज़िम्मेदार नहीं हैं, बल्कि इसकी मुख्य वजह राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन है. कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही और फॉरेंसिक जांच में देरी पर कहा है कि कमज़ोर व्यवस्था की वजह से अपराधियों में क़ानून का डर ख़त्म होता जा रहा है.

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामलों के निपटारे और न्याय मिलने में हो रही देरी के सिलसिले में मशहूर फिल्मी डायलॉग ‘तारीख पे तारीख’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ज़िला अदालतों में बड़ी संख्या में आपराधिक मामलों के लंबित होने के लिए सिर्फ न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि इसकी मुख्य जिम्मेदार राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन है.

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने ज़िला अदालतों में लंबित मामलों, पुलिस की लापरवाही और फॉरेंसिक जांच में देरी पर यूपी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि कमजोर व्यवस्था की वजह से अपराधियों में कानून का डर खत्म होता जा रहा है.

इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पर्याप्त स्टाफ, आधुनिक संसाधन, पुलिस सहयोग और समय पर फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना कोई भी न्यायिक अधिकारी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकता.

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी हत्या के एक आरोपी फतेहपुर निवासी मेवालाल प्रजापति की ज़मानत अर्जी से संबंधित मामले में सामने आई, जिसमें जांचकर्ताओं ने बरामद स्क्रूड्राइवर पर मिले खून का डीएनए मिलान नहीं कराया था. इस चूक पर गंभीर संज्ञान लेते हुए अदालत ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), प्रधान सचिव (गृह) और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के निदेशक को तलब किया था.

सुनवाई के दौरान एफएसएल निदेशक ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश की 12 फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में से केवल आठ में डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा है और इन प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों और आधुनिक उपकरणों की कमी है.

अदालत को यह भी बताया गया कि एफएसएल पुलिस विभाग के अधीन काम करता है, जिससे उसकी प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता सीमित हो जाती है.

इस पर अदालत ने कहा, ‘ज़िला अदालतों में मामलों के लंबित रहने का मुख्य कारण न्यायिक अधिकारियों की क्षमता नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की कमी, पुलिस द्वारा अदालती कार्यवाही का पालन न करना और एफएसएल की रिपोर्टों में देरी और अपूर्णता है. इसलिए, राज्य सरकार और पुलिस ही मुख्य रूप से ज़िला अदालतों में आपराधिक मामलों के लंबित रहने के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि सोशल मीडिया और अन्य आम लोग अपने मामलों के निपटारे में देरी के लिए ज़िला न्यायपालिका को दोषी ठहराते हैं.’

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि आज की तारीख में उत्तर प्रदेश सरकार के 49 प्रतिशत मंत्रियों पर आपराधिक केस दर्ज हैं, जिनमें से 44 प्रतिशत पर संगीन धाराएं लगी हुई हैं.

अदालत ने आगे कहा कि आपराधिक मामलों के लंबित रहने का फायदा उठाकर कई अपराधी बिना किसी डर के बार-बार अपराध करते रहे और उनमें से कई विधायक, सांसद और यहां तक ​​कि मंत्री भी बनते जा रहे हैं.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा समन और वारंट समय पर तामील नहीं किए जाते, गवाह अदालत में पेश नहीं हो पाते और एफएसएल रिपोर्ट में अत्यधिक देरी होती है. इसी वजह से अपराधियों में कानून का डर कम हो रहा है.

पीठ ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को अक्सर अपराधियों से धमकियों का सामना करना पड़ता है और पंजाब और हरियाणा के विपरीत उत्तर प्रदेश में ज़िला न्यायाधीशों को नियमित रूप से निजी सुरक्षा अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं.

इस संबंध में प्रणालीगत खामियों को दूर करने के लिए अदालत ने कई निर्देश जारी किए, जिनमें एक साल के भीतर फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में रिक्त पदों को भरना, फॉरेंसिक बुनियादी ढांचे को अपडेट करना, साक्ष्य संग्रह में पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण देना, ज़िला न्यायालयों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना और गृह विभाग के अधीन फॉरेंसिक सेवा (एफएसएल) को स्वायत्त दर्जा देने पर विचार करना शामिल है.

इस मामले को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित हुए डीजीपी राजीव कृष्णा को अदालती प्रक्रियाओं के निष्पादन में कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने, संबंधित जांचों में डीएनए मिलान अनिवार्य करने और ई-समन, ई-वारंट और गवाहों के बयानों की एआई-आधारित स्पीच-टू-टेक्स्ट रिकॉर्डिंग जैसी डिजिटल प्रणालियों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया.

अदालत ने आखिर में आरोपी की ज़मानत याचिका को खारिज़ कर दिया.