भाजपा सहयोग सेल बना कार्यकर्ताओं के हितों को साधने का माध्यम

कार्यकर्ता आधारित पार्टी की परिकल्पना को साकार करने के लिए मप्र में सत्ता और संगठन ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में सहयोग सेल शुरू किया है। ताकि कार्यकर्ताओं की समस्याओं को मंत्री सुने और उनका समाधान करवाएं। लेकिन सत्ता-संगठन की इस अनूठी पहल का दुरूपयोग होने लगा है। कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए शुरू की गई सहयोग सेल अब ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े आवेदनों का भी प्रमुख केंद्र बनती जा रही है। पहले जहां राजस्व विवादों से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक आती थीं, वहीं स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने के बाद ट्रांसफर कराने के आवेदन तेजी से बढ़े हैं।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पहल पर दिसंबर 2025 में सहयोग सेल की शुरुआत की गई थी। यहां सप्ताह में पांच दिन प्रदेशभर से आने वाले कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनी जाती हैं। इसके लिए प्रतिदिन एक मंत्री और संगठन का एक पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। भाजपा सूत्रों के अनुसार सहयोग सेल में हर महीने करीब एक हजार शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इनमें नामांतरण, बंटवारा और जमीन विवाद जैसे राजस्व मामलों की संख्या सबसे अधिक है। हालांकि हाल के महीनों में कार्यकर्ताओं द्वारा अपने परिजनों और रिश्तेदारों के स्थानांतरण करवाने संबंधी आवेदन भी बड़ी संख्या में आने लगे हैं।
हर बूथ तक पहुंच रहा ड्यूटी चार्ट
भाजपा की सहयोग सेल पिछले पांच महीने से लगातार सक्रिय है। इसके संचालन के लिए महीने की शुरुआत में ही मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों का ड्यूटी चार्ट तैयार किया जाता है। यह सूची पार्टी के प्रत्येक बूथ स्तर तक पहुंचाई जाती है, ताकि कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर निर्धारित दिन पर संबंधित मंत्री और पदाधिकारी से संपर्क कर सकें। पार्टी का दावा है कि इससे कार्यकर्ताओं को सीधे संवाद और त्वरित समाधान का मंच मिल रहा है। वहीं संगठन को भी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी, अपेक्षाओं और स्थानीय मुद्दों की जानकारी मिल रही है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के आवेदन भी पहुंचे
भाजपा सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में सहयोग सेल में भाजपा कार्यकर्ता बनकर अन्य दलों, विशेषकर कांग्रेस से जुड़े लोग भी आवेदन लेकर पहुंचने लगे थे। इसके अलावा गैर-राजनीतिक लोग भी व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आने लगे। इसी को देखते हुए अब आवेदन के साथ जिला अध्यक्ष, विधायक, सांसद या प्रदेश पदाधिकारी की अनुशंसा अनिवार्य कर दी गई है। भाजपा का मानना है कि इससे केवल वास्तविक कार्यकर्ता ही सहयोग सेल तक पहुंच पा रहे हैं और गैर-प्रमाणित आवेदनों में कमी आई है।
पद और केस वापस लेने तक की मांग
सूत्रों के अनुसार सहयोग सेल में कुछ ऐसे आवेदन भी पहुंचे, जिनका सीधा संबंध जनसमस्याओं से नहीं था। एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने पार्टी की किसी समिति में पद देने की मांग को लेकर कई बार संपर्क किया। वहीं एक सरकारी अधिकारी ने अपने खिलाफ लंबित भ्रष्टाचार मामले को वापस लेने का अनुरोध किया। उसका तर्क था कि मामला समाप्त होने पर वह पार्टी के लिए अधिक सक्रियता से काम कर सकेगा। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या के बाद सहयोग सेल की कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव किए गए हैं और आवेदन प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित किया गया है।
संगठनात्मक संवाद का नया तंत्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की सहयोग सेल केवल शिकायत निवारण मंच नहीं रह गई है, बल्कि संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह सेल जनसमस्याओं और संगठनात्मक जरूरतों तक सीमित रहती है तो यह पार्टी के लिए प्रभावी फीडबैक तंत्र साबित हो सकती है। हालांकि प्रशासनिक और कानूनी मामलों में बढ़ती अपेक्षाएं इसकी सीमाओं और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर सकती हैं।
प्रशिक्षण शिविरों में मोबाइल पर सख्ती
भाजपा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के तहत आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों में अब मोबाइल फोन के उपयोग पर और अधिक सख्ती बरती जाएगी। संगठन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण शिविरों में कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वरिष्ठ नेता भी मोबाइल फोन लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। हाल ही में कुछ जिलों में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। इनमें कुछ कार्यकर्ता स्विमिंग पूल में नजर आए, जबकि कुछ नेताओं के साथ अनौपचारिक तस्वीरें साझा करते दिखाई दिए। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता माना है। भाजपा के अनुसार प्रशिक्षण शिविरों का उद्देश्य वैचारिक और संगठनात्मक प्रशिक्षण देना है। मोबाइल फोन के उपयोग से प्रशिक्षण की गोपनीयता और अनुशासन प्रभावित होता है। इसी कारण अब शिविर स्थलों पर मोबाइल ले जाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।