प्रयागराज संगम से अयोध्या सरयू तट तक गूंजा जल संरक्षण का संदेश, शिक्षक दया शंकर द्विवेदी के अभियान की हुई सराहना.

मंगल भारत:रामपुर नैकिन/सीधी। जल ही जीवन है और जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। इसी सोच को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विकासखंड रामपुर नैकिन के शिक्षक श्री दया शंकर द्विवेदी द्वारा “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत प्रयागराज के पावन त्रिवेणी संगम एवं अयोध्या धाम स्थित पवित्र सरयू नदी तट पर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, जल स्रोतों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के इन दोनों तीर्थ स्थलों पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों एवं युवाओं को जल के महत्व से अवगत कराया गया। अभियान में लोगों को बताया गया कि यदि आज जल संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट मानव सभ्यता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इस अवसर पर “जल है तो कल है”, “हर बूंद कीमती है” तथा “नदियों को बचाएं, भविष्य संवारें” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।
अभियान में सनत द्विवेदी, उमेश द्विवेदी, मोहित द्विवेदी, प्रदीप तिवारी (चुरहट), विनोद मिश्रा, मामदार, जीवेश सेन, शिवमूर्ति साकेत सहित अन्य सहयोगियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी ने मिलकर जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रयागराज एवं अयोध्या के स्थानीय नागरिकों, सैकड़ों श्रद्धालुओं, पुलिस प्रशासन, प्रशासनिक अधिकारियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने अभियान की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के हित में एक अनुकरणीय पहल बताया। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता अभियान समय की आवश्यकता हैं, जिनसे लोगों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
इस जनहितकारी कार्य के लिए सीधी जिला प्रशासन, जिला जनगणना अधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, उपखंड राजस्व अधिकारी विकास कुमार आनंद, तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष मिश्रा, तहसीलदार चुरहट साक्षी गौतम, उपखंड अधिकारी कुसमी शैलेश द्विवेदी, राकेश शुक्ला, दीपक पांडे, निर्वाचन शाखा की प्रोग्रामर प्रियंका मिश्रा, शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण जनों द्वारा श्री दया शंकर द्विवेदी को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गईं।
समाज निर्माण में शिक्षक की भूमिका का उत्कृष्ट उदाहरण
भारतीय संस्कृति में सदैव शिक्षक को राष्ट्र निर्माता एवं समाज का मार्गदर्शक माना गया है। शिक्षक केवल विद्यालय में विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपने विचारों, संस्कारों और कार्यों के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान करता है। जब कोई शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक, पर्यावरणीय एवं राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाता है, तब उसका प्रभाव विद्यालय की चारदीवारी से निकलकर पूरे समाज पर दिखाई देता है।
श्री दया शंकर द्विवेदी इसी विचारधारा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। वे वर्षों से विभिन्न सामाजिक एवं शासकीय जन-जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। राष्ट्रीय जनगणना, निर्वाचन नामावली पुनरीक्षण, मतदाता जागरूकता अभियान, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
शिक्षक बदलेंगे सोच, तो विश्वगुरु बनेगा भारत
समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि यदि देश का प्रत्येक शिक्षक अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ समाज और राष्ट्रहित के ऐसे कार्यों में सहभागिता निभाए, तो भारत को पुनः विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। एक जागरूक शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करता है, बल्कि पूरे समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करता है। श्री दया शंकर द्विवेदी द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किया गया यह प्रयास इसी सोच को साकार करता दिखाई देता है।
प्रयागराज और अयोध्या जैसे आस्था के केंद्रों से जल संरक्षण का संदेश देकर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि जन-जागरूकता ही किसी भी सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति है। उनका यह अभियान न केवल जल संरक्षण बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
क्षेत्र के लोगों ने उम्मीद जताई है कि ऐसे प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे और जल संरक्षण के प्रति समाज में व्यापक चेतना का निर्माण करेंगे। वास्तव में श्री दया शंकर द्विवेदी का यह कार्य शिक्षा, समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के संगम का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
शीर्षक विकल्प:
प्रयागराज से अयोध्या तक जल संरक्षण की अलख, शिक्षक दया शंकर द्विवेदी बने जन-जागरूकता के प्रेरणास्रोत
जब शिक्षक बना समाज का प्रहरी: दया शंकर द्विवेदी ने दिया जल बचाने का संदेश
विश्वगुरु भारत की सोच को मजबूत कर रहे शिक्षक दया शंकर द्विवेदी, जल संरक्षण अभियान की हर ओर चर्चा
रामपुर नैकिन के शिक्षक ने संगम और सरयू तट से जगाई जल संरक्षण की चेतना