राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, चुनाव आयोग पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद सियासी विवाद गहरा गया है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने नामांकन में तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार (8 जून, 2026) को रद्द कर दिया गया. इसके बाद भोपाल से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलते रहे और कांग्रेस ने चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.

नटराजन का नामांकन कथित तौर पर इस आधार पर रद्द किया गया कि उन्होंने अपने शपथपत्र में अपने खिलाफ लंबित एक मामले का विवरण नहीं दिया था. नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचा, लेकिन पार्टी का आरोप है कि उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के कार्यालय के बाहर धरना दिया.

कांग्रेस ने एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर ‘हर लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने’ का आरोप लगाया.

पार्टी ने कहा, ‘जब संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक सुविधा के औजार में बदल दिया जाता है, तब लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता. मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया जाना हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.’

कांग्रेस ने आगे कहा, ‘जब कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल इस फैसले को चुनौती देने के लिए चुनाव आयोग पहुंचा तो अधिकारियों ने उनसे मिलने तक से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें आयोग के बाहर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा. पूरा देश यह देख रहा है.’

कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को भी नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करने वाला है.

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, सांसद जयराम रमेश, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे थे. हालांकि उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने बाहर धरना दिया.

कांग्रेस ने कहा, ‘इस तरह की हर कार्रवाई संस्थाओं की स्वतंत्रता और हमारे लोकतंत्र की सेहत पर गंभीर सवाल खड़े करती है. लोकतंत्र जनता का है, उन लोगों का नहीं जो इसे कमजोर करना चाहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी और चुनाव आयोग उन सभी लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाना चाहते हैं जो सरकार को चुनौती देती हैं. लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा.’

इससे पहले मंगलवार को भाजपा के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्रों पर आपत्ति जताई थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित एक निजी शिकायत का हवाला दिया.

वहीं कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि नटराजन के नामांकन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.

तन्खा ने कहा, ‘कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है. केवल एक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें पूछा गया है कि उनके और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए. मीनाक्षी जी के वकील ने इस नोटिस का जवाब भी दे दिया है. कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.’

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार को हराने के लिए उसने ‘राजनीतिक मर्यादा की सभी सीमाएं पार कर दी हैं.’

कमलनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों को राज्य से बाहर ले जा रहे विमान को जानबूझकर विलंबित किया गया. उन्होंने नटराजन के नामांकन पर की गई आपत्ति को उनकी उम्मीदवारी को पटरी से उतारने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश बताया.

कांग्रेस ने अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने की योजना बनाई थी.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि ‘जो बात पहले वोट चोरी तक सीमित थी, अब सीट चोरी तक पहुंच गई है.’

उन्होंने कहा, ‘जब उन्हें लगा कि यह एकजुट सदन है, बंटा हुआ नहीं, तब उन्होंने एक कानूनी नोटिस का सहारा लिया, जिस पर अभी कोई संज्ञान भी नहीं लिया गया था. उन्होंने चुनाव याचिका को चुनौती दी. हमारे दोनों वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं, लेकिन उन्हें सुना नहीं गया और फैसला सुना दिया गया.’

नटराजन ने कहा, ‘अब उनकी मंशा साफ हो गई है. यह सिर्फ एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि देश में एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई है.’
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं और उसके पास राज्यसभा की दो सीटें आसानी से जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है. इसके बावजूद पार्टी ने चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारे हैं, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, प्रदेश इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल और राज्य मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट.

महेश केवट की उम्मीदवारी के बाद क्रॉस-वोटिंग और दल-बदल की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं.

इस बीच मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ शिकायत से जुड़े दस्तावेज उन्हें कांग्रेस शासित तेलंगाना से मिले हैं, जहां नटराजन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की प्रभारी हैं.
विजयवर्गीय ने कहा, ‘हमारे पास ये दस्तावेज कहां से आए? किसने दिए? इससे आप कांग्रेस की हालत समझ सकते हैं. हमें तेलंगाना से कागज़ मिल रहे हैं, जहां कांग्रेस की सरकार है और वहीं से हमें जानकारी दी जा रही है. कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु ले जाए या कहीं और, लेकिन देश की जनता का भरोसा मोदी पर है.’