तमिलनाडु: थाने में हिरासत में हुई पिता-पुत्र की मौत के आरोपी नौ पुलिसकर्मियों को सज़ा-ए-मौत

जून 2020 में तुथुकुडी ज़िले के सथानकुलम में पी. जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. उन्हें हिरासत में बेरहमी से यातनाएं दी गईं, जिसके बाद उन चोटों के कारण दोनों की मौत हो गई. अब मदुरै की ज़िला अदालत ने इस जघन्य अपराध के आरोपी नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा सुनाई और एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया है.

नई दिल्ली: लगभग छह साल पहले तमिलनाडु के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में 58 वर्षीय पी. जयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे बेनिक्स की हत्या के दोषी ठहराए गए सभी नौ पुलिसकर्मियों को सोमवार (6 अप्रैल) को मौत की सज़ा सुनाई गई और कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मदुरै की पहली अतिरिक्त ज़िला और सत्र अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई. न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने सोमवार को कहा, ‘यदि यही अपराध आम नागरिकों ने किया होता, तो सामान्य सज़ा दी जा सकती थी, लेकिन यहां स्वयं पुलिस ने ही अपराध किया है.’

उन्होंने आगे यह भी कहा कि उम्रकैद की सज़ा ‘पुलिस अधिकारियों में डर पैदा नहीं करेगी.’

द हिंदू के अनुसार, न्यायाधीश मुथुकुमारन ने यह भी कहा, ‘जहां शक्ति होती है, वहां जिम्मेदारी भी होनी चाहिए. जयराज और बेनिक्स निहत्थे थे और पुलिस स्टेशन में पूरी रात उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया.’

मौत की सज़ा के अलावा, इन नौ पुलिसकर्मियों– एस. श्रीधर, के. बालकृष्णन, पी. रघुगनेश, एस. मुरुगन, ए. सामीदुरई, एम. मुथुराजा, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस और एस. वेलुमुथु – पर हत्या, अवैध हिरासत और झूठा मामला दर्ज करने सहित विभिन्न आरोप लगे थे और उन पर कुल 1,00,40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.
उनकी मौत की सज़ा पर अमल तभी होगा, जब मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच इसकी पुष्टि कर देगी.

एक दसवें पुलिसकर्मी ए. पॉलदुरई का नाम भी इस मामले में था, लेकिन अगस्त 2020 में जेल में कोविड-19 से उनकी मौत हो गई थी.

ज्ञात हो कि तुथुकुडी जिले के सथानकुलम में पुलिसकर्मियों ने 19 जून 2020 को मोबाइल फोन की दुकान चलाने वाले जयराज को कथित रूप से लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया था. बाद में उनके बेटे बेनिक्स को भी तब हिरासत में लिया गया जब वह अपने पिता की तलाश में वहां पहुंचे.

आरोप था कि दोनों को हिरासत में बेरहमी से यातनाएं दी गईं और कुछ दिनों बाद 22 और 23 जून को क्रमशः उनकी चोटों के कारण मौत हो गई.

सीबीआई ने सितंबर 2020 को इन नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि फॉरेंसिक साक्ष्यों से पता चला है कि जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को इतनी बुरी तरह से पीटा गया था कि उनका खून दीवारों पर फैल गया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें उनके ही कपड़ों से खून पोंछने के लिए मजबूर किया था.

आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने बेनिक्स को थाने के फर्श पर फैले खून को उसकी बनियान से पोछने के लिए मजबूर किया था. सीबीआई ने कहा था कि पुलिस ने इस अपराध को छिपाने के लिए बेनिक्स और जयराज के खिलाफ झूठी एफआईआर भी दर्ज की थी. जांच से पता चला है कि पीड़ितों ने लॉकडाउन दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं किया था.