रामपुर नैकिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: ‘पहले तहसील जाओ, स्टे लाओ, तभी लिखेंगे रिपोर्ट.सीधी.

रामपुर नैकिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: ‘पहले तहसील जाओ, स्टे लाओ, तभी लिखेंगे रिपोर्ट.

मेढ़ विवाद और गाली-गलौज मामले में पुलिसकर्मी महेंद्र विश्वकर्मा के कथित बयान से भड़के पीड़ित; डाक से भेजा शिकायती पत्र.

रामपुर नैकिन (सीधी)।मध्य प्रदेश के सीधी जिले के अंतर्गत आने वाले रामपुर नैकिन थाने की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जमीन की जबरन खुदाई और गाली-गलौज से परेशान एक पीड़ित जब न्याय की आस लेकर थाने पहुंचा, तो वहां तैनात पुलिसकर्मी ने मदद करने के बजाय उसे कानूनी पचड़ों में उलझाकर बैरंग लौटा दिया। मामले में पुलिस विभाग के कर्मचारी महेंद्र विश्वकर्मा पर पीड़ित को टरकाने और रिपोर्ट दर्ज न करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

*📌 क्या है पूरा मामला*?प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामपुर नैकिन निवासी पीड़ित भैयालाल गुप्ता (पिता द्वारिका प्रसाद गुप्ता) की ग्राम पड़खुड़ी 557में स्थित पुश्तैनी जमीन पर विपक्षी सत्यम पाण्डेय द्वारा जेसीबी (JCB) मशीन लगाकर बलपूर्वक मेढ़ की खुदाई की जा रही थी। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस अवैध खुदाई का विरोध किया, तो विपक्षी द्वारा उनके साथ सरेआम मां-बहन की अश्लील गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी दी गई। इस विवादित भूमि का मामला पहले से ही सिविल न्यायालय रामपुर नैकिन में विचाराधीन है।
*🗣️ “पहले तहसील जाओ, स्टे लाओ*…”पीड़ित भैयालाल गुप्ता का आरोप है कि जब वे इस दबंगई और गाली-गलौज की शिकायत लेकर रामपुर नैकिन थाना पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी महेंद्र विश्वकर्मा ने उनकी फरियाद सुनने से साफ इनकार कर दिया। उक्त पुलिसवाले द्वारा पीड़ित से कथित तौर पर कहा गया कि, “यह जमीन का मामला है, पहले तहसील जाओ और वहां से कोर्ट का स्टे (स्थगन आदेश) लेकर आओ, तभी तुम्हारी रिपोर्ट लिखी जाएगी।”पुलिस के इस ठंडे रवैये और असंवेदनशीलता के कारण पीड़ित को थाने से बिना कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा।
*📬 पीड़ित ने डाक से भेजा आवेदन*, उच्चाधिकारियों से गुहारथाने में सुनवाई न होने से हताश पीड़ित भैयालाल गुप्ता ने हार नहीं मानी। उन्होंने कानून पर भरोसा जताते हुए अपने हस्ताक्षरित शिकायती पत्र को पंजीकृत डाक (Registered Post) के माध्यम से सीधा रामपुर नैकिन थाना को भेजा है। पीड़ित का कहना है कि मौके पर शांति भंग होने और कभी भी बड़ा खूनी संघर्ष होने की आशंका है। यदि समय रहते पुलिस ने हस्तक्षेप कर मेढ़ की खुदाई को नहीं रुकवाया, तो उन्हें जान-माल की भारी क्षति हो सकती है।❓ *जनता का सवाल:* क्या गाली-गलौज और धमकी पर भी चाहिए स्टे?इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस की भूमिका पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन का मालिकाना हक तय करना भले ही राजस्व विभाग या कोर्ट का काम हो, लेकिन मौके पर जेसीबी चलाकर जबरन कब्जा करना, गाली-गलौज करना और शांति भंग करना पूरी तरह से आपराधिक कृत्य है। ऐसे में रामपुर नैकिन थाने के पुलिसकर्मी द्वारा “स्टे ऑर्डर” की शर्त रखना केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है।अब देखना यह होगा कि डाक द्वारा आवेदन मिलने के बाद रामपुर नैकिन थाना पुलिस इस मामले में क्या संज्ञान लेती है, या फिर पीड़ित को न्याय के लिए जिला मुख्यालय (सीधी) के चक्कर काटने पड़ेंगे।