ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों का 39वां दिन: ट्रंप की धमकियां बढ़ीं, ईरान ने कहा- हमले रुकने की गारंटी पर ही समझौता

ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमले जारी हैं. ट्रंप ने नए सिरे से कड़ी चेतावनी दी है, जबकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि भविष्य में हमला न होने की गारंटी मिले बिना वह युद्ध खत्म नहीं करेगा. क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है.

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों का सिलसिला मंगलवार (7 अप्रैल) को 39वें दिन में पहुंच गया है. हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ तीखी बयानबाज़ी भी जारी है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी धमकियों को और विस्तार देते हुए देश के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाने की बात कही है.

ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने तय समयसीमा तक समझौता नहीं किया तो ‘पूरा देश एक रात में तबाह किया जा सकता है.’ उन्होंने मंगलवार रात 8 बजे (ईडीटी के अनुसार) की डेडलाइन को अंतिम बताया और कहा कि इससे पहले ईरान को कई मौके दिए जा चुके हैं. अमेरिका की ओर से 45 दिन के संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे तेहरान ने ठुकरा दिया है और स्थायी रूप से युद्ध खत्म करने की मांग की है.

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल तभी युद्धविराम के लिए तैयार होगा, जब उसे भविष्य में हमले न होने की गारंटी दी जाए. काहिरा में ईरान के राजनयिक मिशन के प्रमुख मोजतबा फर्दौसी पूर ने कहा कि पिछले दौर की बातचीत के दौरान हुए अमेरिकी हमलों के बाद अब ईरान को ट्रंप प्रशासन पर भरोसा नहीं है.

इस तनाव का असर खाड़ी क्षेत्र में भी दिखने लगा है. सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे एहतियातन बंद कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि ईरानी हमलों की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. करीब 25 किलोमीटर लंबा यह पुल बहरीन को अरब प्रायद्वीप से जोड़ने वाला एकमात्र सड़क मार्ग है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.

मैदान में इज़रायल की सैन्य कार्रवाई भी तेज बनी हुई है. इज़रायली सेना ने दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया. यह क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है, जो कतर के साथ साझा है और ईरान की घरेलू ऊर्जा जरूरतों का प्रमुख स्रोत है. इससे पहले मार्च में इसी इलाके पर हमले के बाद ईरान ने मध्य-पूर्व के अन्य देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया था, जिससे तनाव और बढ़ गया था.

इज़रायल ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े खुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खदेमी और कुद्स फोर्स की एक गुप्त इकाई के प्रमुख असघर बकेरी को मार गिराने का भी दावा किया है. इज़रायल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि शीर्ष ईरानी अधिकारियों को ‘एक-एक कर निशाना बनाया जाएगा.’

तेहरान में आम लोगों के लिए हालात बेहद कठिन होते जा रहे हैं. स्थानीय निवासियों के मुताबिक, लगातार बमबारी, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं. कई लोग रात गुजारने के लिए नींद की गोलियों का सहारा ले रहे हैं, जबकि बिजली, गैस और पानी की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ रही है.

इज़रायल ने तेहरान के बह्रम, मेहराबाद और अजमायेश हवाई अड्डों पर भी हमले किए हैं, जहां ईरानी वायुसेना के कई हेलीकॉप्टर और विमान क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है.

इस बीच, ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी नागरिक ‘आज़ादी के लिए कष्ट सहने को तैयार हैं,’ हालांकि जमीनी स्तर पर किसी बड़े जनविद्रोह के संकेत नहीं दिख रहे हैं. जब उनसे नागरिक ढांचे पर हमलों को लेकर संभावित युद्ध अपराध के आरोपों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया है. संगठन के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि ऐसे हमले किसी भी परिस्थिति में जायज नहीं ठहराए जा सकते.

कूटनीतिक स्तर पर भी कोशिशें जारी हैं. मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये की मध्यस्थता में एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें संघर्षविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की बात शामिल है. हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से सामान्य समय में दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. ईरान ने 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इज़रायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी है.

कुल मिलाकर, 39 दिनों से जारी इस संघर्ष में सैन्य हमले, सख्त बयानबाज़ी और असफल कूटनीतिक प्रयास एक साथ चलते दिख रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात में किसी ठोस सुधार के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं.