अमेरिका ने ईरान को प्रस्ताव देने का समय देने के नाम पर संघर्षविराम बढ़ाने की बात कही है, लेकिन तेहरान ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी. बंदरगाहों की घेराबंदी और जारी हमलों के बीच क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और कूटनीतिक समाधान अब भी अनिश्चित नजर आ रहा है.

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों का संकट 54वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं. एक ओर संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और बातचीत की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीन पर हमले, प्रतिबंध और आपसी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं.
ट्रंप का दावा: संघर्षविराम बढ़ाया, लेकिन दबाव बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्षविराम को आगे बढ़ा दिया है, ताकि तेहरान को युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्ताव देने का और समय मिल सके.
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी. यही बात इस पूरे संघर्षविराम को कमजोर बनाती है, क्योंकि एक तरफ बातचीत की बात हो रही है और दूसरी तरफ दबाव की नीति जारी है.
ईरान ने ट्रंप के इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उसके रुख में पहले जैसा ही सख्ती बनी हुई है.
ईरान का रुख: ‘घेराबंदी युद्ध जैसा कदम’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अगराची ने साफ कहा है कि ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी ‘युद्ध की कार्रवाई’ है और यह संघर्षविराम का उल्लंघन है.
तेहरान पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि वह ‘धमकियों के साये में’ या दबाव की स्थिति में किसी भी बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा.
ईरान की संसद से जुड़े एक सलाहकार ने यह भी कहा कि संघर्षविराम को आगे बढ़ाने का मकसद सिर्फ वक्त हासिल करना हो सकता है, ताकि आगे किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी की जा सके.
ज़मीन पर हालात: हमले थमने का नाम नहीं
संघर्षविराम के बावजूद क्षेत्र में हिंसा जारी है. दक्षिणी लेबनान के अल-बय्यादा कस्बे में इज़रायली सेना ने कई घरों को ध्वस्त कर दिया. इन धमाकों की गूंज टायर शहर तक सुनी गई.
इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान के अन्य इलाकों में भी हमलों में नागरिक घायल हुए हैं और मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिसे 10 दिन के संघर्षविराम का उल्लंघन माना जा रहा है.
पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जहां यहूदी बस्तियों के निवासियों (सेटलर्स) द्वारा एक बच्चे समेत दो लोगों की हत्या की खबर है.
ईरान के भीतर: चेतावनी और तैयारियां
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर पड़ोसी देशों की ज़मीन से हमले किए गए, तो पूरे पश्चिम एशिया में तेल उत्पादन को निशाना बनाया जा सकता है.
वहीं, ईरान ने यह भी दोहराया है कि अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी संघर्षविराम को कमजोर कर रही है और हालात को और बिगाड़ सकती है.
कूटनीतिक मोर्चा: बातचीत की कोशिशें, लेकिन भरोसा नहीं
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने आधिकारिक तौर पर ट्रंप के संघर्षविराम बढ़ाने के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन संकेत दिए हैं कि बातचीत के लिए दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं है.
हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी घेराबंदी को ईरान समझौते में सबसे बड़ी बाधा मान रहा है.
इसी बीच, अमेरिका ने ईरान के हथियार कार्यक्रम से जुड़े नए प्रतिबंध लगाए हैं, यूरोपीय संघ भी अपने कदम कड़े करने की तैयारी में है.
वॉशिंगटन डीसी में इज़रायल और लेबनान के बीच राजनयिक स्तर की वार्ता की तैयारी हो रही है, जहां लेबनान की ओर से इज़रायली सेना की पूरी वापसी प्रमुख मांग बताई जा रही है.
खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक असर
खाड़ी क्षेत्र में भी इस संघर्ष का असर साफ दिखाई दे रहा है.
ट्रंप ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ संभावित करेंसी स्वैप व्यवस्था पर विचार होने की बात कही है, जो युद्ध के आर्थिक प्रभाव को देखते हुए अहम माना जा रहा है.
वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही अब भी गंभीर रूप से प्रभावित है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है.
लेबनान की स्थिति: मानवीय संकट गहराता हुआ
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए देश को लगभग 587 मिलियन डॉलर की जरूरत है.
इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्षविराम बेहद नाजुक स्थिति में है, और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं.