सोन घड़ियाल अभयारण्य में अवैध खनन का महाखुलासा: पुलिस और दलालों के गठजोड़ के बीच जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट.

मंगल भारत.रामनगर/मैहर-सीधी: मध्य प्रदेश के सोन घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र से अवैध बालू खनन का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ग्राम कुंवरी में प्रतिबंधित नदी क्षेत्र से दिन-रात हो रहे उत्खनन को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है।
प्रमुख सुर्खियां (Headlines):
प्रतिबंधित क्षेत्र में गर्ज रही जेसीबी: सोन नदी के सीने को चीरकर निकाली जा रही अवैध बालू।
मिलीभगत का खेल: पुलिस और दलालों के संरक्षण में फल-फूल रहा खनन माफिया।
कानून को चुनौती: पटवारी को कुचलने और तहसीलदार पर हमले के आरोपी का फिर आतंक।
इकोसिस्टम पर खतरा: दुर्लभ घड़ियालों और कछुओं के प्राकृतिक आवास पर मंडराया विनाश का साया।
विस्तृत समाचार:
प्रशासनिक मौन पर उठे सवाल
जनपद पंचायत रामनगर (वार्ड क्रमांक 15) के जनपद सदस्य राजेन्द्र सिंह (मुन्ना) ने संजय टाइगर रिजर्व और सोन घड़ियाल अभयारण्य के क्षेत्र संचालक को एक लिखित शिकायत भेजकर इस पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। शिकायत में सीधे तौर पर ग्राम सरिया निवासी संजय सिंह पर अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र में मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर उत्खनन कराने का आरोप लगाया गया है।
खौफनाक है आरोपी का इतिहास
हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद प्रशासन कार्रवाई से बच रहा है। शिकायत के अनुसार, संबंधित व्यक्ति पर पूर्व में ड्यूटी पर तैनात पटवारी को ट्रैक्टर से कुचलने, एक चालक की संदिग्ध मौत और कार्रवाई के दौरान तहसीलदार पर जानलेवा हमला करने जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। ऐसे खतरनाक अपराधी का अभयारण्य क्षेत्र में बेखौफ घूमना और अवैध खनन करना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है।
पर्यावरण की बलि
सोन नदी का यह हिस्सा घड़ियाल और दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के संरक्षण के लिए आरक्षित है। एनजीटी (NGT) के सख्त निर्देशों के बावजूद जेसीबी और ट्रैक्टरों का शोर जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रहा है। अवैध उत्खनन से न केवल जलीय जीवों का प्रजनन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सरकार को भी करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
जनपद सदस्य की सख्त मांगें:
खनन स्थल की तत्काल मौके पर जाकर उच्च स्तरीय जांच हो।
अवैध कार्य में लिप्त सभी वाहनों को राजसात (Seize) किया जाए।
अपराधी और उसे संरक्षण देने वाले ‘वर्दीधारी’ दलालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का संकेत है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह माफियाओं के आगे घुटने टेकता है या सोन नदी के इन ‘बेजुबान’ घड़ियालों के घर को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।