इबोला संकट के बीच भारत ने जारी की एडवाइजरी, कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह

मध्य अफ्रीका में इबोला संक्रमण बढ़ने के बाद भारत सरकार ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी है. सरकार ने प्रमुख हवाई अड्डों पर सख्त स्क्रीनिंग व्यवस्था लागू की है. डब्ल्यूएचओ ने इस प्रकोप को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है.

नई दिल्ली: अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भारत सरकार ने नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी है. यह सलाह ऐसे समय में आई है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मध्य अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार (23 मई, 2026) को यह परामर्श जारी किया. इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने इस प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ (पीएचईआईसी) की श्रेणी में रखा था. अधिकारियों ने कांगो में संक्रमण के खतरे को राष्ट्रीय स्तर पर ‘बहुत अधिक’ और क्षेत्रीय स्तर पर ‘उच्च’ बताया है, हालांकि वैश्विक जोखिम को अभी ‘निम्न’ माना गया है.

मौजूदा संक्रमण इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है. इस कारण स्वास्थ्य एजेंसियां तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर जोर दे रही हैं.

23 मई तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर 216 हो गई है, जबकि संदिग्ध और पुष्टि किए गए मामलों की कुल संख्या 968 तक पहुंच गई है.

इस बीच भारत सरकार ने भी संभावित संक्रमण को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित देश के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश बिंदुओं पर सख्त जांच व्यवस्था लागू की है.

इसके तहत डीआरसी, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले या इन देशों से होकर गुजरने वाले यात्रियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. इन मार्गों पर संचालित विमानों में स्वास्थ्य संबंधी अनिवार्य घोषणाएं की जाएंगी और यात्रियों को सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म (एसडीएफ) भरने होंगे.

सरकार ने निर्देश दिया है कि यदि किसी यात्री में इबोला जैसे लक्षण दिखाई देते हैं या वह किसी संभावित संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आया है, तो उसे इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करने से पहले एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर (एपीएचओ) या स्वास्थ्य डेस्क को इसकी जानकारी देनी होगी.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रवेश बिंदुओं पर चौबीसों घंटे थर्मल स्क्रीनिंग और निगरानी की व्यवस्था भी शुरू की है, ताकि बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की पहचान की जा सके. हवाई अड्डों पर अलग आइसोलेशन कक्ष और त्वरित चिकित्सा सहायता वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि संदिग्ध मामलों को तुरंत अलग कर अस्पताल भेजा जा सके.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि चिन्हित देशों से आने वाले सभी यात्रियों को कानूनी रूप से 21 दिनों तक अपने स्वास्थ्य की निगरानी करनी होगी. इस दौरान यदि उनमें कोई लक्षण दिखाई देता है, तो उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी होगी और अपनी यात्रा संबंधी जानकारी साझा करनी होगी.
डब्ल्यूएचओ पहले भी गंभीर इबोला प्रकोपों को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करता रहा है. 2014 में पश्चिमी अफ्रीका में फैले बड़े इबोला संकट के दौरान संगठन ने इसे वायरस की खोज (1976) के बाद का सबसे जटिल प्रकोप बताया था.

डब्ल्यूएचओ लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि इबोला पर नियंत्रण के लिए तेज निगरानी, संक्रमित लोगों के संपर्कों की पहचान और समुदाय स्तर पर सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है.

हालांकि ज़ैरे इबोला वायरस के लिए कुछ टीके और उपचार विकसित किए जा चुके हैं, लेकिन बुंडीबुग्यो जैसे अपेक्षाकृत दुर्लभ स्ट्रेन के लिए अब तक कोई स्वीकृत चिकित्सा उपाय उपलब्ध नहीं हैं.