गैंगरेप के आरोपों से बरी आसाराम, नाबालिग से रेप के मामले में उम्रक़ैद बरक़रार

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वयंभू बाबा आसाराम को नाबालिग से सामूहिक बलात्कार और सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया. हालांकि, एक अन्य नाबालिग से बलात्कार के मामले में उसकी सज़ा बरक़रार रखा, जिसके तहत वह अब भी उम्रक़ैद की सज़ा काट रहा है.

नई दिल्ली: स्वयंभू संत आसाराम को बुधवार (27 मई) को राजस्थान हाईकोर्ट से आंशिक राहत मिली. अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और पॉक्सो कानून के तहत नाबालिग से सामूहिक बलात्कार और सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया.

हालांकि, नाबालिग से बलात्कार के मामले में उनकी सजा बरकरार रखा, जिसके तहत वह अब भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की पीठ ने आईपीसी की धारा 376(डी), पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(जी)/6 के तहत उनकी सज़ा को रद्द कर दिया. साथ ही आईपीसी की धारा 120(बी) के तहत आपराधिक साजिश के आरोपों को भी हटा दिया.

हालांकि अदालत ने आईपीसी की धारा 376(2)(एफ) के तहत नाबालिग से बलात्कार के मामले में उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी. इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा भी कायम रही.

पीठ ने आसाराम को सरेंडर करने का भी निर्देश दिया, क्योंकि वह फिलहाल अस्थायी ज़मानत पर बाहर है, जिसे इस महीने की शुरुआत में 15 जून तक के लिए बढ़ाया गया था.

हाईकोर्ट ने आईपीसी की कई अन्य धाराओं के तहत भी दोषसिद्धि बरकरार रखी, जिनमें धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) और 354(A) (यौन उत्पीड़न) शामिल हैं. इसके अलावा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8, किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 34 के तहत भी सजा बरकरार रखी गई.

हालांकि सह-आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को आईपीसी की धारा 370(4) (धारा 120(B) के साथ पढ़ी जाने वाली) और धारा 370(D) के आरोपों से बरी कर दिया. इससे पहले इन धाराओं के तहत उनकी पिछली सज़ाओं को रद्द कर दिया गया था.

आसाराम और सह-आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 20 अप्रैल को अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसला सुनाने से पहले पीठ ने कथित तौर पर कहा कि उसके निष्कर्ष में ‘मिलीजुली बातें’ हैं और आरोपियों से पूछा कि वे पहले कौन-सा हिस्सा सुनना चाहते हैं.

आसाराम को 2018 में उसके आश्रम में एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था. उन्हें आईपीसी, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम की सज़ा को छह महीने के लिए निलंबित किया था और उन्हें स्वास्थ्य कारणों से अंतरिम जमानत दी थी. इससे पहले आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से भी छह महीने की अंतरिम ज़मानत मिली थी.

गौरतलब है कि आसाराम बलात्कार के दो मामलों में दोषी है और 31 अगस्त 2013 से जेल में है. उस पर पॉस्को कानून और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप हैं.

जनवरी 2023 में गांधीनगर की सेशंस कोर्ट ने आसाराम को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी. अदालत ने पाया था कि उन्होंने 2001 से 2006 के बीच अपने मोटेरा आश्रम में 16 वर्षीय लड़की के साथ कई बार बलात्कार किया. उसे भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था, जिनमें बलात्कार, अप्राकृतिक अपराध, गलत तरीके से बंदी बनाना, धमकाना, हमला करना या किसी को रोकने के लिए बल प्रयोग करना और छेड़छाड़ शामिल हैं.

इसके साथ ही गांधीनगर की एक अदालत ने आसाराम के खिलाफ 2013 में दर्ज एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. उस पर अहमदाबाद के पास मोटेरा स्थित अपने आश्रम में 2001 से 2006 के बीच सूरत की रहने वाली एक महिला अनुयायी का कई बार यौन उत्पीड़न करने का आरोप है.

उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 376 2 (सी) (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 342 (गलत तरीके से हिरासत में रखना), 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 357 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से बंधक बनाने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया था.

गौरतलब है कि दोषसिद्धि से पहले आसाराम एक प्रमुख धार्मिक नेता माने जाते थे. उसने 1970 के दशक में अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे अपना पहला आश्रम बनाया था और बाद में करोड़ों रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया.