एसआईआर प्रक्रिया वैध है और यह चुनाव आयोग की संवैधानिक

शक्तियों से परे नहीं जाती। एसआईआर अभ्यास अनुपातिकता के सिद्धांत पर खरा उतरता है। इसमें पर्याप्त प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए चुनाव आयोग के पास वैध और उचित आधार थे। कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, यह तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने बुधवार को कहा- एसआईआर मनमाना नहीं है और चुनाव आयोग को यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा-आयोग वोटर लिस्ट में नाम जोडऩे या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह फैसला सिर्फ चुनावी उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध के आधार पर जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके नाम 4 हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजा जाए। सीजेआई ने कहा- एसआईआर प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है।