आवासीय विस्तार की बड़ी तस्वीर पेश कर रहे जनगणना के आंकड़े

भोपाल/मंगल भारत। मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, आवासीय विकास और आर्थिक गतिविधियों का असर अब जनगणना के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। वर्ष 2026 की जनगणना के प्रथम चरण में सामने आए प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2011 के बाद से अब तक करीब 90 लाख नए मकान जुड़े हैं। यानी पिछले लगभग 15 वर्षों में राज्य में हर साल औसतन छह लाख नए आवासों का इजाफा हुआ है। जनगणना अधिकारियों के मुताबिक अंतिम आंकड़े अभी जारी होना बाकी हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े प्रदेश में आवासीय विस्तार की बड़ी तस्वीर पेश कर रहे हैं।
जनगणना संचालनालय द्वारा किए गए मकान सूचीकरण और आवास गणना कार्य में प्रदेशभर में 2 करोड़ 40 लाख से अधिक मकानों की पहचान की गई है। जबकि वर्ष 2011 की जनगणना में मध्यप्रदेश में लगभग 1 करोड़ 49 लाख मकान दर्ज किए गए थे। इस प्रकार डेढ़ दशक में आवासों की संख्या में लगभग 90 लाख की वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल डाटा सत्यापन और अंतिम संकलन का कार्य अभी जारी है, इसलिए मकानों की संख्या में मामूली वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
बंद मकानों का प्रतिशत लगभग दोगुना हुआ
हालांकि इस बार की जनगणना में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रदेश में चिन्हित किए गए कुल मकानों में लगभग 0.80 प्रतिशत मकान ऐसे मिले हैं, जिनमें सर्वेक्षण के दौरान ताले लगे हुए थे। जनगणना की भाषा में इन्हें बंद मकान की श्रेणी में रखा गया है। वर्ष 2011 में ऐसे मकानों का अनुपात केवल 0.40 प्रतिशत था। यानी पिछले 15 वर्षों में बंद मकानों का प्रतिशत लगभग दोगुना हो गया है। विशेषज्ञों और जनगणना अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं। रोजगार की तलाश में लोगों का दूसरे शहरों या राज्यों में जाना, बच्चों की शिक्षा के लिए परिवारों का बड़े शहरों में स्थानांतरण और एक से अधिक शहरों में मकान रखने की बढ़ती प्रवृत्ति इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली और निवेश के रूप में संपत्ति खरीदने की प्रवृत्ति ने भी बंद मकानों की संख्या बढ़ाने में भूमिका निभाई है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कुछ जिलों में बंद मकानों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई है। इनमें प्रमुख रूप से बड़े शहर और तेजी से विकसित हो रहे जिले शामिल हैं। इंदौर, भोपाल और छतरपुर जैसे जिलों में 2,500 से 3,000 तक ऐसे मकान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें सर्वेक्षण के दौरान कोई नहीं मिला और वे बंद पाए गए। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।
2 करोड़ 40 लाख से अधिक मकानों की गणना
जनगणना संचालनालय के अनुसार मकान सूचीकरण और आवास गणना (एचएलओ) का फील्ड वर्क निर्धारित समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। एक मई से 30 मई तक चले इस अभियान में प्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया। जहां 2 करोड़ 38 लाख 33 हजार मकानों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं वास्तविक रूप से 2 करोड़ 40 लाख 69 हजार से अधिक मकानों की गणना की गई। इस आधार पर प्रदेश का प्रदर्शन 100.99 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस व्यापक सर्वेक्षण में 1.37 लाख से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों को शामिल किया गया। करीब 1.24 लाख प्रगणकों ने घर-घर पहुंचकर जानकारी एकत्र की। इसके अलावा बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अभियान में सहयोग किया। पहली बार जनगणना का यह चरण पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न किया गया, जिससे आंकड़ों के संकलन और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनी।