राम मंदिर चढ़ावा: ‘राम राज्य कोष’ भी जांच के दायरे में, अविनाश शुक्ला की पुलिस हिरासत की मांग

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की दो दिन की पुलिस हिरासत की मांग की है. पुलिस अब एसबीआई के दो कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है, जो मंदिर के तय बैंक अकाउंट में कैश जमा करने से पहले चढ़ावे की गिनती की नियमित निगरानी करते थे. जांच के घेरे में श्याम साधनालय योग केंद्र भी आया है जहां ‘राम राज्य कोष’ नाम की एक दानपेटी मिली है.

नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन की जांच अब और व्यापक हो गई है. पुलिस अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वित्तीय लेन-देन, चल-अचल संपत्तियों, दान की गिनती और जमा करने की पूरी प्रक्रिया तथा इससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.

खबरों के अनुसार, इसके साथ ही समानांतर रूप से चलाए जा रहे एक अलग चंदा संग्रह अभियान को भी जांच के दायरे में लाया गया है.

पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की दो दिन की पुलिस हिरासत की मांग की है. शुक्ला के ठिकाने से सबसे अधिक करीब 20.39 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी द्वारा अयोध्या जेल में अविनाश शुक्ला से पूछताछ के बाद पुलिस हिरासत की अर्जी दी गई है. अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ के दौरान शुक्ला ने ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के नाम बताए.

25 जून को दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपियों के घरों पर पुलिस ने अतिरिक्त तलाशी भी ली.

पीटीआई के अनुसार, शुक्ला के घर से मिले नगदी के अलावा करुणेश पांडेय से 18.07 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा से 16.82 लाख रुपये, लवकुश मिश्रा से 14.25 लाख रुपये, रमाशंकर मिश्रा से 7.32 लाख रुपये, रमाशंकर यादव से 1 लाख रुपये बरामद किए हैं.

इसके अलावा पुलिस ने 1,110 अमेरिकी डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा, लगभग 11 ग्राम सोना और करीब 375 ग्राम चांदी भी जब्त की है.

जांच का दायरा गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों से आगे बढ़ गया है. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, पुलिस अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के दो ग्रेड 3 कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है, जो मंदिर के तय बैंक अकाउंट में कैश जमा करने से पहले चढ़ावे की गिनती की नियमित निगरानी करते थे.

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कथित रूप से धन की हेराफेरी उनकी जानकारी के बिना संभव थी, जबकि वे पूरी गिनती प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहते थे.

आरोपियों और जांच के दायरे में आए एसबीआई कर्मचारियों के आधार और पैन संबंधी विवरण आयकर विभाग, राजस्व विभाग और विकास प्राधिकरणों को भेजे गए हैं.

इन विभागों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि, उनकी आर्थिक स्थिति क्या है, उनके पास कितनी चल-अचल संपत्ति है और क्या उनकी आय के अनुपात से अधिक संपत्ति है.

पुलिस दान की गिनती में लगे अन्य कर्मचारियों की जानकारी भी इकट्ठा कर रही है. इनमें वाराणसी स्थित सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी भी शामिल हैं.

यह एजेंसी तब विवादों में आ गई, जब पता चला कि गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह इसी कंपनी के माध्यम से नियुक्त किए गए थे.

‘राम राज्य कोष’ भी जांच के घेरे में

जांच के दौरान एक नया पहलू सामने आया है. पुलिस को श्याम साधनालय योग केंद्र में ‘राम राज्य कोष’ नाम का एक दानपात्र मिला, जहां अविनाश शुक्ला कथित तौर पर रह रहा था.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं का मानना है कि शुक्ला ने ‘राम राज्य प्रशासन’ नाम से एक संगठन बनाया था और अयोध्या के कई जगहों पर दान पेटियां रखवाई थीं. इनमें डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड (QR Code) भी लगाए गए थे.

हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बाद अधिकांश दान पेटियां हटा दी गईं, लेकिन योग केंद्र में रखी एक पेटी वहीं रह गई.

योग केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि शुक्ला ने जून की शुरुआत में वहां दानपेटी रखी थी. वह हमेशा ताले से बंद रहती थी. 7 जून को पुलिस शुक्ला को साथ लेकर वहां पहुंची और कुछ नकदी बरामद की.
उन्होंने यह भी दावा किया कि चोरी का मामला सामने आने के तुरंत बाद केंद्र प्रबंधन ने शुक्ला से परिसर खाली करने को कहा.

टेलीग्राफ ने वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि पुलिस ने 30 जून को प्रतापगढ़ स्थित शुक्ला के पैतृक घर पर भी छापा मारा, जहां पता चला कि वह अपने माता-पिता के मकान के बगल में नया घर बनवा रहा था.

एसआईटी को 15 दिन का और समय मिला

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अपनी जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है.

एसआईटी ने मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच के लिए और समय मांगा था. अब उसे 15 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

एसआईटी की शुरुआती जांच में पहले ही ऐसे सबूत मिले थे कि जिनसे पता चलता था कि भक्तों के चढ़ावे का एक हिस्सा संग्रह और गिनती के दौरान व्यवस्थित रूप से दूसरी ओर मोड़ा जा रहा था.

विहिप जिम्मेदार नहीं: आलोक कुमार

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि इस कथित चोरी ने ‘दुनिया भर के हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पंहुचाई है.’ और मामले से जुड़े हर व्यक्ति की निष्पक्ष एवं गहन जांच होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय की जानी चाहिए.

पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बारे में पूछे जाने पर आलोक कुमार ने कहा, ‘मैंने विहिप अध्यक्ष के तौर पर में चार बिंदुओं वाला बयान जारी किया था – तुरंत एफआईआर दर्ज हो, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शीघ्र जांच हो, फास्ट-ट्रैक अदालत में रोज़ाना सुनवाई हो और दोषियों को चार से पांच महीने के भीतर सज़ा मिले. आप चाहते हैं कि मैं आज ही उन्हें (चंपत राय) पद से हटा दूं, जबकि जांच पूरी भी नहीं हुई है. अभी तक किसी ने राय पर आरोप नहीं लगाया है. आरोप उनके ड्राइवर पर हैं.’

हालांकि, जब राय की भूमिका के बारे में खासतौर पर पूछा गया, तो कुमार ने माना कि ‘वे लापरवाही के दोषी हो सकते हैं.’

उल्लेखनीय है कि चंपत राय वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं.