मुंबई-पुणे 
एक्सप्रेसवे के 6,695 करोड़ रुपये की लागत वाले ‘मिसिंग लिंक’ का उद्घाटन हुए महज दो महीने ही हुए थे कि भारी बारिश के दौरान भूस्खलन से इसका एक हिस्सा प्रभावित हो गया. यातायात रोकना पड़ा और लोगों को पुराने हाईवे से भेजा गया. एमएसआरडीसी ने इसे ‘कुदरत का खेल’ बताया है.
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में भारी बारिश के चलते सोमवार (6 जुलाई, 2026) को हुए भूस्खलन में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई और हाल ही में शुरू हुए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ पर यातायात कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना इस एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक के उद्घाटन के महज़ दो महीने बाद ही सामने आई है.
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 मई को इस मिसिंग लिंक का उद्घाटन किया था. इसे 6,695 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था और इसे एक्सप्रेसवे के दुर्घटना-प्रवण खंडाला घाट सेक्शन के लिए एक स्थायी समाधान के तौर पर पेश किया गया था.
यह महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट – जिसमें दो सुरंगें और 183 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है – मॉनसून की अपनी पहली परीक्षा में फेल हो गया. सोमवार को हुए भूस्खलन के कारण यात्रियों को वापस पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर लौटना पड़ा.
मालूम हो कि यह देश में अपनी तरह का सबसे ऊंचा ब्रिज है, जिसका मकसद मुंबई-पुणे की यात्रा को लगभग 6 किलोमीटर छोटा करना और यात्रा के समय को 30 मिनट तक कम करना था.
‘कुदरत का खेल’
स्टेट हाईवे पुलिस के अनुसार, लगातार बारिश के बाद सोमवार तड़के भूस्खलन हुआ. पुणे-मुंबई कैरिजवे पर पहली सुरंग के पास एक रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) क्षतिग्रस्त हो गई और पानी सड़क पर बहने लगा.
अधिकारियों ने पुणे-मुंबई कैरिजवे को बंद कर दिया और दोनों तरफ का ट्रैफिक अस्थायी रूप से रोक दिया गया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे मुंबई-पुणे की तरफ का रास्ता फिर से खोल दिया गया, जबकि पुणे-मुंबई रूट बंद रहा.
मुंबई जाने वाले ट्रैफिक को पुराने मुंबई-पुणे हाईवे (एनएच-48) से डायवर्ट किया गया. हालांकि, उसी समय पुराने हाईवे पर भी एक पेड़ बिजली की लाइन पर गिरने से यातायात प्रभावित हुआ.
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने इस घटना को ‘दैवीय घटना’ बताया और कहा कि इसमें कॉन्ट्रैक्टर की कोई गलती नहीं थी.
एमएसआरडीसी के उपाध्यक्ष अनिल कुमार गायकवाड़ ने अखबार को बताया, ‘यह कॉन्ट्रैक्टर की गलती नहीं है; यह कुदरत का खेल है.’
गायकवाड़ ने आगे कहा, ‘सुरंग के ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन ‘फॉल्स फ्रेम’ – जो सुरंग के किनारों पर बना एक बाहरी ढांचा होता है – उसे नुकसान पहुंचा है.’
अखबार में एमएसआरडीसी के एक और अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि चट्टान गिरने से बचाव के उपाय किए गए थे, लेकिन एक्सप्रेसवे पर गिरे पत्थर 150 मीटर की ऊंचाई से आए थे, जिन्हें रोका नहीं जा सकता था.
अधिकारी ने अखबार को बताया, ‘…चट्टान गिरने से बचाव के उपाय किए गए हैं, जिन्हें आईआईटी-बॉम्बे ने मंज़ूरी दी है. इसमें टनल के ऊपर पहाड़ पर 15 मीटर की ऊंचाई तक रॉक बोल्टिंग मेश लगाना शामिल है. वह अभी भी सही-सलामत है. लेकिन जो पत्थर नीचे गिर रहे हैं, वे लगभग 150 मीटर की ऊंचाई से आ रहे हैं. इतनी भारी बारिश कुदरती घटना जैसी है, जिसे रोकने के लिए बहुत कुछ नहीं किया जा सकता.’
कॉरपोरेशन ने कहा कि टनल को कोई स्ट्रक्चरल नुकसान नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि सुरक्षा और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद इसे कल देर रात फिर से खोल दिया गया.