नरोत्तम का टिकट कटा, समर्थकों का बवाल, जिला अध्यक्ष समेत कई नेताओं के इस्तीफे.

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री और छह बार के विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर युवा चेहरे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर अभूतपूर्व असंतोष सामने आया है। टिकट घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही दतिया और डबरा में भाजपा कार्यकर्ता सडक़ों पर उतर आए, हाईवे जाम कर दिया गया, बाजार बंद रहे और जिला अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम न केवल दतिया उपचुनाव बल्कि प्रदेश भाजपा की भविष्य की राजनीति को लेकर भी बड़े संकेत दे रहा है। शुक्रवार शाम दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी के नाम की घोषणा होते ही दतिया का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। पार्टी नेतृत्व ने लंबे समय से दतिया की राजनीति का चेहरा रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। इस फैसले की उम्मीद अधिकांश कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नहीं थी।
घोषणा के तुरंत बाद बड़ी संख्या में समर्थक दतिया भाजपा कार्यालय के बाहर जुट गए। नारेबाजी शुरू हुई और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन शहर की सडक़ों तक पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों ने ग्वालियर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया, जिससे लगभग दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। दतिया शहर के कई प्रमुख बाजार भी बंद रहे। प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। समर्थकों का कहना था कि यदि पार्टी ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
भाजपा जिला अध्यक्ष ने दिया सबसे बड़ा झटका
विरोध का सबसे बड़ा असर संगठनात्मक स्तर पर देखने को मिला। भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाहा ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए पार्टी नेतृत्व को खुली चेतावनी दे दी। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष को भेजे पत्र में कहा कि दतिया के कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी की गई है और प्रत्याशी चयन का फैसला एकतरफा है। उन्होंने दावा किया कि जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगरपालिका अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत प्रतिनिधियों, छह मंडलों के अध्यक्षों, मोर्चा पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। कुशवाहा ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि टिकट नहीं बदला गया तो वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे।
डैमेज कंट्रोल में जुटा प्रदेश संगठन
दतिया में बढ़ते विरोध और संभावित संगठनात्मक संकट को देखते हुए प्रदेश भाजपा नेतृत्व तुरंत सक्रिय हो गया है। भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय से पूरे घटनाक्रम की निगरानी की जा रही है। इस्तीफा देने वाले नेताओं और नाराज कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यह नाराजगी शांत नहीं हुई तो उपचुनाव में संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित हो सकती है। दतिया भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता है और ऐसे में आंतरिक असंतोष चुनावी समीकरण बदल सकता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा केवल एक विधायक या पूर्व मंत्री नहीं हैं, बल्कि मध्यप्रदेश भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। छह बार विधायक रहे। लगभग दो दशकों तक भाजपा सरकारों में मंत्री रहे। गृह मंत्री के रूप में राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाई। संगठन और सत्ता के बीच मजबूत समन्वयक माने जाते रहे। ऐसे नेता का टिकट कटना सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
नरोत्तम मिश्रा की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
टिकट कटने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है। वे फिलहाल डबरा में मौजूद हैं। हालांकि उनके समर्थकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मिश्रा की चुप्पी कई तरह के संकेत दे रही है। एक ओर वे पार्टी अनुशासन बनाए रखना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर समर्थकों की नाराजगी उनके राजनीतिक प्रभाव का भी प्रदर्शन कर रही है।
आशुतोष तिवारी ने साधा संतुलन
विरोध के बीच भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। तिवारी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि उन्होंने फोन पर उन्हें बधाई भी दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा कार्यकर्ता अंतत: एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और पार्टी दतिया उपचुनाव में जीत दर्ज करेगी।
भाजपा ने दे दिया पीढ़ी परिवर्तन का संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दतिया का यह फैसला केवल एक सीट का उम्मीदवार चयन नहीं, बल्कि भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा 66 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी द्वारा अपेक्षाकृत युवा चेहरे आशुतोष तिवारी को मौका देना यह संकेत माना जा रहा है कि भाजपा आने वाले वर्षों में नई पीढ़ी को आगे लाने की तैयारी कर रही है। पिछले कुछ समय से पार्टी कई ऐसे फैसले ले रही है जिनमें परंपरागत समीकरणों को तोडकऱ नए चेहरों को अवसर दिया गया है। दतिया का निर्णय उसी श्रृंखला की सबसे बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में बढ़ी बेचैनी
नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े नेता का टिकट कटने के बाद प्रदेश भाजपा के उन नेताओं में भी चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और जिनकी आयु 65 वर्ष से अधिक है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगले विधानसभा चुनाव तक भाजपा कई वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक भूमिकाओं में भेजकर नए नेतृत्व को आगे बढ़ा सकती है। यदि ऐसा होता है तो दतिया उपचुनाव भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला पहला बड़ा संकेत साबित हो सकता है।
उपचुनाव से पहले भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा
दतिया उपचुनाव अब केवल भाजपा और विपक्ष के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। यह चुनाव भाजपा के लिए संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति की भी परीक्षा बन गया है। पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने और चुनावी मैदान में एकजुटता बनाए रखने की है। आने वाले 24 घंटे इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि जिला अध्यक्ष द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बाद भाजपा को त्वरित निर्णय लेने पड़ सकते हैं। दतिया की सियासत में उठे इस तूफान का असर केवल एक उपचुनाव तक सीमित रहेगा या फिर यह मध्यप्रदेश भाजपा की भविष्य की राजनीति की नई पटकथा लिखेगा, इस पर अब पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।