दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने किंगमेकर

कांग्रेस नाराज नायक को मनाने में तो भाजपा भी साधने की कोशिश में जुटी.


भोपाल/मंगल भारत
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अवधेश नायक अचानक चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल उन्हें अपने पक्ष में बनाए रखने अथवा साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस टिकट नहीं मिलने से नाराज नायक को मनाने में जुटी है, जबकि भाजपा उनके पुराने वैचारिक और संगठनात्मक संबंधों को आधार बनाकर उन्हें अपने पाले में लाने की संभावनाएं तलाश रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नायक का रुख उपचुनाव के समीकरणों पर निर्णायक असर डाल सकता है।
कांग्रेस ने इस बार भी अवधेश नायक को उम्मीदवार नहीं बनाया और घनश्याम सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद नायक समर्थकों में खुलकर नाराजगी सामने आई। हालात को संभालने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं उनके निवास पहुंचे और उनके साथ भोजन कर संगठन की एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया कि वर्ष 2023 में अवधेश नायक को टिकट नहीं मिलने में उनकी भी भूमिका रही थी। उन्होंने मंच से ही नायक से माफी मांगते हुए पुराने मतभेद दूर करने की कोशिश की।
भाजपा भी साधने में जुटी
इधर भाजपा ने भी इस राजनीतिक अवसर को भुनाने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी अवधेश नायक के घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद नायक के भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। सूत्रों के अनुसार भाजपा संगठन स्तर पर भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और वरिष्ठ नेताओं के बीच रणनीतिक चर्चा हुई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अवधेश नायक का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा से शुरू हुआ था। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। यही वजह है कि दोनों दल उन्हें अपने लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं। वहीं जारी एक वीडियो संदेश में अवधेश नायक ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल भारतीय जनता पार्टी में जाने का उनका कोई विचार नहीं है और इस संबंध में चल रही खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह उनके बड़े भाई जैसे हैं और पार्टी के खिलाफ जाने का कोई सवाल नहीं है। नायक ने समर्थकों से भी अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
भाजपा ने कार्यकर्ताओं को दिया जीत का मंत्र
उधर भाजपा ने दतिया उपचुनाव को प्रतिष्ठा का चुनाव मानते हुए संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने दतिया में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की प्रतिष्ठा का चुनाव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से हर बूथ पर पूरी ताकत और समर्पण के साथ जुटने का आह्वान करते हुए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को ऐतिहासिक जीत दिलाने का लक्ष्य दिया। अजय जामवाल ने कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रत्येक बूथ को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से काम करें और हर बूथ पर अधिक से अधिक मतों की बढ़त सुनिश्चित करें।
नायक की भूमिका पर टिकी राजनीतिक नजर
दतिया उपचुनाव में अब सबसे बड़ी नजर अवधेश नायक के अगले राजनीतिक कदम पर है। हालांकि उन्होंने भाजपा में जाने की अटकलों को खारिज कर दिया है, लेकिन टिकट नहीं मिलने से उपजा असंतोष पूरी तरह समाप्त हुआ है या नहीं, इस पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि नायक यदि पूरी सक्रियता से कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करते हैं तो चुनावी मुकाबले की दिशा बदल सकती है, जबकि उनकी निष्क्रियता या अलग रणनीति दोनों दलों के लिए नए समीकरण पैदा कर सकती है।