अयोध्या और बद्रीनाथ के बाद अब तमिलनाडु के मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप; 8 अधिकारी निलंबित

तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित अरुलमिगु कोनियम्मन मंदिर में हुंडी (दानपात्र) की राशि गबन के मामले में रविवार को आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. इससे पहले अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से भी चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आए हैं, जिन पर जांच जारी है.

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर और उत्तराखंड में बद्रीनाथ मंदिर के बाद अब तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित अरुलमिगु कोनियाम्मन मंदिर में भी चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आए हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के एक मंदिर में हुंडी (दानपात्र) की राशि गबन के मामले में आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को रविवार (26 जुलाई) को निलंबित कर दिया गया.

हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्त (एचआर एंड सीई) मंत्री पीके शेखर बाबू के आदेश पर की गई इस कार्रवाई में चोरी के आरोप का सामना कर रहे चार कर्मचारियों के अलावा गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के आरोप में चार पर्यवेक्षी अधिकारियों (supervisory officials) को भी निलंबित किया गया है.

यह कार्रवाई 15 जुलाई को मंदिर की हुंडी में प्राप्त दानराशि की निर्धारित गणना के दौरान कथित अनियमितताओं की एचआर एंड सीई विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त आयुक्त रमेश कुमार द्वारा की गई जांच के बाद की गई.

चढ़ावे के पैसों का गलत प्रबंधन

उल्लेखनीय है कि अरुलमिगु कोनियम्मन मंदिर में दान पेटी के पैसे के गलत प्रबंधन का मामला सबसे पहले 15 जुलाई को सामने आया, जब मंदिर में चढ़ावा गिनती का काम चल रहा था. बताया जा रहा है कि मंदिर में चढ़ावा गिन रहे कुछ लोगों ने दान पात्र को मुख्य जगह से अलग रख दिया और इसके बाद उसे मंदिर के पीछे ट्रॉली में ले जाया गया. वहीं से करीब 31,000 रुपये निकाल लिए और आपस में बांट लिए.

इस घटना की जांच एचआर एंड सीई के संयुक्त आयुक्त रमेश कुमार ने शुरू की और पैसे के गलत प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान की. और बताया कि इस चोरी में टिकट कलेक्टर ए. बालासुब्रमण्यन (52), ऑफिस असिस्टेंट वी. सरवनन (34), सफाई कर्मचारी पी. प्रदीप कुमार (31) और मंदिर के पुजारी एस. कृष्णराज (56) शामिल हैं.

इस संबंध में शनिवार (25 जुलाई) को उक्कडम पुलिस द्वारा इन चारों को गिरफ्तार कर लिया गया. इनके अलावा चार अन्य निगरानी अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप है.

इस मामले में पुलिस और विभाग दोनों स्तर पर कार्रवाई जारी है. मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की है कि वे चढ़ावा जमा करते समय सतर्क रहें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत दें.

बड़े पैमाने पर गबन के कई मामले

गौरतलब है कि इससे पहले अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के बाद मंदिरों में चढ़ावा चोरी से जुड़े मामलों की कड़ी में अरुलमिगु कोनियाम्मन मंदिर का विवाद सबसे नया है. अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा की जा रही है.

बताया गया है कि डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी फील्ड जांच पूरी कर ली है और मंदिर के दान प्रबंधन सिस्टम से जुड़े 70 से ज़्यादा कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं. सबूत इकट्ठा करने के अलावा, जांच अब उन प्रशासनिक खामियों की भी पड़ताल कर रही है जिनकी वजह से मंदिर में बार-बार नकद पैसे की हेराफेरी होती रही. गिनती के दौरान चढ़ावे की रकम हड़पने के आरोप में सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

इसी तरह के एक मामले में उत्तराखंड के चमोली ज़िले की पुलिस की एसआईटी यूनिट ने बद्रीनाथ धाम से कथित तौर पर फंड चोरी होने के मामले में बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से पिछले तीन सालों के चढ़ावे का रिकॉर्ड मांगा है. इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

इस संबंध में बीकेटीसी के मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को 17 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था. उन पर आरोप है कि 30 जून को सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने तीन बार गिनती वाले कमरे से नगदी की चोरी की थी. मंदिर में उनके रहने की जगह पर पुलिस की छापेमारी में विदेशी मुद्रा और दूसरी संपत्तियां मिली हैं.

वहीं, इससे कुछ समय पहले बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोप में देहरादून स्थित उनके घर से गिरफ़्तार किया गया था.

इस पूरे मामले पर बीकेटीसी द्वारा बनाई चार सदस्यों वाली एक आंतरिक समिति ने समिति के अध्यक्ष को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंप दी है. इसके अलावा इस मामले में एसआईटी और राज्य सरकार की ओर से बनाई गई एक उच्च-स्तरीय समिति की जांच भी जारी है.