मेडिकल स्टूडेंट से बढ़ी फीस वसूलने पर रोक, पिटिशन पर हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश

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मंगल भारत जबलपुर. पीपुल्स मेडिकल कॉलेज भोपाल द्वारा स्टेट कोटे के 33 छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जस्टिस आरएस झा और जस्टिस नंदिता दुबे की युगलपीठ ने सोमवार को छात्रों की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश दिया।

वैशाली नवलकर व 32 अन्य छात्रों की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि उन्हें नीट 2017 के बाद हुई काउंसलिंग के जरिए पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के कोर्स में एडमीशन मिला था। एडमीशन के दौरान उन्हें फीस स्ट्रक्चर सवा 7 लाख रुपए सालाना बताया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने तय फीस और दस्तावेज जमा करके एडमीशन लिया और अपनी पढ़ाई शुरू कर दी।

इसके बाद 8 सितंबर 2017 को मप्र निजी विवि विनियामक आयोग भोपाल ने फीस में 1 लाख 65 हजार रुपए की बढ़ोत्तरी कर दी। इस आदेश के परिप्रेक्ष्य में पीपुल्स कॉलेज ने नोटिस लगाकर छात्रों को फीस तत्काल जमा करने कहा। फीस जमा न होने पर उनके एडमीशन निरस्त करने, क्लास में न बैठने देने और परीक्षा से वंचित करने की चेतावनी दिए जाने पर पीड़ित छात्रों की ओर से यह याचिका दायर की गई।

मामले पर सोमवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उनका कहना था कि आयोग ने क्षेत्राधिकार न होने के बाद भी बिना छात्रों का पक्ष सुने फीस बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया, जो अवैधानिक है।

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सुनवाई के बाद युगलपीठ ने बढ़ी फीस वसूलने पर रोक लगा दी। मॉप अप राउण्ड में गड़बड़ी मामले पर सुनवाई टली- नीट 2017 के बाद हुई मॉप अप राउण्ड की काउंसलिंग में आरोपित तौर पर हुई गड़बड़ी के मामले पर प्रदेश के डीएमई और सीबीएसई की ओर से हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी गई है।

जस्टिस आरएस झा और जस्टिस नंदिता दुबे की युगलपीठ ने इस मामले पर फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में सुनवाई करने कहा है। युगलपीठ ने ये निर्देश साईश्री सूरी, शिवानी सिंह, पृथ्वी नायक, शैलजा पाण्डेय, आदिश जैन, प्राची सिंह परिहार और प्रान्शु अग्रवाल की ओर से दायर याचिकाओं पर दिए।

इन याचिकाकर्ताओं में से एक पृथ्वी नायक के अनुसार नीट 2017 में उन्हें अच्छे अंक मिले थे और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलने की पूरी उम्मीद थी, क्योंकि वे मप्र के ही मूल निवासी थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार को फिर से काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए और इसके लिए अतिरिक्त मोहलत भी दी गई थी।

याचिका में आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार पहले दो चरणों में काउंसलिंग भी हुई, लेकिन बची हुई सीटों के लिए 9 व 10 सितम्बर को काउंसलिंग कराई गई। आरोप है 10 सितम्बर की रात्रि 12 बजे तक चयनित छात्र कॉलेज में पहुंचकर दाखिला ले सकते थे, लेकिन इसकी अंतिम सूची आवेदकों का कहना है कि चयनित छात्रों की सूची 10 सितम्बर की शाम 7 बजे जारी हुई और चयनित छात्रों को सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित कॉलेज 12 बजे तक पहुंचने कहा गया।

आरोप है कि चयनित छात्रों के न पहुंचने पर प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने रात्रि 12 बजे से पहले सीटें 25 से 80 लाख रुपए में अयोग्य छात्रों को बेच दीं। इस बारे में संबंधितों को शिकायतें देने के बाद भी कोर्ई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई। इन मामलों पर हाईकोर्ट ने सरकार से मॉप अप राउण्ड की काउंसलिंग की रिपोर्ट पेश करने कहा था।

विगत 9 जनवरी को हाईकोर्ट ने डीएमई को कहा था कि मॉप अप राउण्ड के बाद एडमीशन पाने वाले छात्रों का पूरा ब्यौरा उन्हें नीट 2017 में मिले अंकों के साथ पेश किया जाए। सोमवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान डीएमई की ओर से रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद युगलपीठ ने सुनवाई मुलतवी कर दी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी, सतीश वर्मा व शासन की ओर से उपमहाधिवक्ता दीपक अवस्थी पैरवी कर रहे हैं। पी-4 पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के 33 छात्रों की याचिका पर हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश