सरकार लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को बढ़ाकर लगभग 850 तक करने की योजना बना रही है. इस फैसले को संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण से जोड़ा जा रहा है. सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने सदन में सवाल उठाया कि सरकार इतनी जल्दी में क्यों है और महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना पूरी क्यों नहीं की जा सकती.

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को बढ़ाकर लगभग 850 तक करने की योजना बना रही है. इस फैसले को संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण से जोड़ा जा रहा है. हालांकि, विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे प्रतिनिधित्व पूरी तरह आबादी के अनुपात पर आधारित हो जाएगा, जो उन इलाकों में केंद्रित है जहां भाजपा को अधिक समर्थन मिलता है.
सीपीआई (एम) के के. राधाकृष्णन उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने इन विधेयकों का विरोध किया है. उनका कहना है कि यह सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करता है.
कौन-कौन से तीन विधेयक पेश किए गए हैं?
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
परिसीमन विधेयक, 2026
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
डीएमके सांसद टीआर बालू के सवाल पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि किसी ने विधेयक के खिलाफ काला झंडा दिखाया या किसी अन्य रंग का, इससे लोकसभा को कोई फर्क नहीं पड़ता.
विपक्ष के विरोध के बीच बिरला ने एक सवाल पूछा, जो कि किरण रिजिजू के बयान की याद दिलाता है- ‘क्या आप महिला आरक्षण के खिलाफ हैं?’
हालांकि, न तो रिजिजू और न ही बिरला ने यह याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था.
अमित शाह ने धार्मिक आधार पर आरक्षण पर कही बात
अमित शाह ने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. उन्होंने आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, ‘हम धर्म के आधार पर कभी आरक्षण नहीं देंगे.’
उन्होंने कहा, ‘सरकार पहले ही जातिगत जनगणना कराने का फैसला कर चुकी है. यह कहा जा रहा है कि इसमें जाति का कॉलम नहीं है. अभी घरों की गिनती हो रही है और घरों की कोई जाति नहीं होती. अगर समाजवादी पार्टी की मर्जी चलती, तब घरों की भी जाति होती. जब नागरिकों की गिनती होगी, तब जाति का कॉलम होगा. यह मेरा मंत्रालय है और मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जनगणना में जाति शामिल होगी.’
शाह ने धर्मेंद्र यादव पर मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग करने का आरोप लगाते हुए इसे ‘संविधान विरोधी’ बताया.
उन्होंने कहा, ‘यह सरकार महिलाओं को धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं देगी. यह संविधान के खिलाफ है और ऐसा आरक्षण देने का सवाल ही नहीं उठता.’
इस पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शाह के बयान को ‘अलोकतांत्रिक’ बताया. उन्होंने कहा, ‘महिलाएं इस देश की आधी आबादी हैं. मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्या मुस्लिम महिलाएं इस आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं?’
इस पर शाह ने जवाब दिया कि अगर समाजवादी पार्टी चाहे तो वह अपने सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है.
‘इतनी जल्दी में क्यों हैं?’
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया, ‘इतनी जल्दी क्यों है?’ उन्होंने पूछा कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना पूरी क्यों नहीं की जा सकती.
उन्होंने कहा, ‘जब जनगणना पूरी होगी, तब हम जातिगत आंकड़ों की मांग करेंगे. जब जातिगत जनगणना हो जाएगी, तब हम आरक्षण की मांग करेंगे. इसी वजह से आप अभी इसे लाकर सभी को गुमराह कर रहे हैं.’
इससे पहले, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार (14 अप्रैल) को केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण विधेयक को बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के जल्दबाज़ी में लाने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि 2027 की जनगणना के तहत होने वाली जातिगत गणना को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने में शामिल न किया जा सके.
द हिंदू से बातचीत में सपा प्रमुख ने अपडेटेड जनसंख्या आंकड़ों के बिना परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाया था. उनका कहना था, ‘सरकार ने नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के बिना परिसीमन कराने का फैसला क्यों किया है? जब सरकार जातिगत गणना कराने पर सहमत हो चुकी है, तो महिला आरक्षण जैसे व्यापक प्रभाव वाले कानून को लाते समय इसे ध्यान में क्यों नहीं रखा जा रहा है?’
251 से अधिक सदस्यों के समर्थन से संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश
संविधान संशोधन विधेयक को सदन में पेश करने के लिए हुए मत विभाजन में 251 से अधिक सदस्यों ने इसके समर्थन में वोट दिया. इसके साथ ही विधेयक को सदन में पेश कर दिया गया. वहीं, 185 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया.