केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों में महिलाओं के

साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी दाउदी बोहरा समुदाय की ओर से पेश हुए सीनियर वकील नीरज किशन कौल की दलील के जवाब में की। कौल ने कहा था कि ज्ञान और समझ, चाहे वह किसी भी सोर्स से मिली हो, उसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है। कौल एक अखबार में कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के लिखे लेख का हवाला दे रहे थे। वहीं सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-हम सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों, विधिवेत्ताओं आदि का सम्मान करते हैं, लेकिन निजी राय तो निजी राय ही होती है। सीनियर वकील श्याम दीवान ने कहा- क्या मैं कोएल्हो मामले के संबंध में दो या तीन बातें रख सकता हूं। पहली बात, अगर कोई नौ जजों की बेंच का फैसला पढ़ता है – जिसमें संवैधानिक इतिहास का जिक्र है – तो कोर्ट ने साफ तौर पर यह महसूस किया कि पार्ट तीन के प्रावधानों को अलग-थलग करके नहीं पढ़ा जा सकता।