दो महीने में सदस्य से मंत्री: निशांत की ‘ताजपोशी’ से नीतीश कुमार की ‘वंशवाद विरोधी’ राजनीति पर उठे सवाल

राज्य सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी शामिल हैं. पहली बार सक्रिय राजनीति में आए निशांत को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आजीवन परिवारवाद और वंशवादी राजनीति का विरोध करने वाले नीतीश कुमार अब अपने बेटे की राजनीतिक पारी को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं.

नई दिल्ली: राजनीति में कदम रखने के दो महीने बाद ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सत्ता के साझेदार भी बन गए हैं. 8 मार्च, 2026 को जदयू की सदस्यता लेकर उन्होंने आधिकारिक तौर पर राजनीति में कदम रखा था. 7 मई, 2026 को उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली. निशांत को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

इस घटना के साथ ही बिहार में वंशवादी राजनीति की उस परंपरा को आगे बढ़ाया गया, जिसका नीतीश कुमार लंबे समय तक विरोध करते रहे थे.

पटना के गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार समेत कई नेता मौजूद थे. हिंदी पट्टी के इस राज्य में पहली भाजपा सरकार बनने के जश्न के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने पटना में रोड शो भी किया.
निशांत कुमार ने शपथ लेने से पहले अपने पिता नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिए.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके निशांत कुमार लंबे समय से सक्रिय राजनीति में आने की मांगों को टालते रहे थे. हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने के फैसले के बाद जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं का दबाव बढ़ता गया, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा.

रिपोर्ट के अनुसार, जदयू चाहती थी कि सम्राट चौधरी सरकार में निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि फिलहाल उनका ध्यान संगठन को मजबूत करने पर रहेगा.

निशांत कुमार ने रविवार (3 मई) को अपनी पहली बड़ी राजनीतिक पहल ‘सद्भाव यात्रा’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना है.

इससे पहले, 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उनके साथ जदयू के दो नेता- विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री के पद की शपथ ली थी. लेकिन तब मंत्रिमंडल में किसी अन्य मंत्री को शामिल नहीं किया गया था. 7 मई को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान निशांत और 31 अन्य सदस्यों ने शपथ ली.

तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे बने मंत्री

नई कैबिनेट में बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे मंत्री बने हैं. निशांत कुमार के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी ने भी मंत्री पद की शपथ ली.

नई कैबिनेट में नीतीश कुमार सरकार के पिछले मंत्रिमंडल के ज्यादातर चेहरों को रखा गया है. वहीं, जदयू से निशांत कुमार, श्वेता गुप्ता और शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, जबकि भाजपा से मिथिलेश तिवारी जैसे नए चेहरों को शामिल किया गया है. वरिष्ठ भाजपा नेता और कई बार मंत्री रह चुके मंगल पांडेय के साथ पार्टी के दो अन्य नेताओं- सुरेंद्र मेहता और नारायण प्रसाद को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पांडे पार्टी के भीतर संगठनात्मक भूमिका निभा सकते हैं.
एनडीए गठबंधन की इस सरकार में भाजपा के सम्राट चौधरी और जदयू के दो उपमुख्यमंत्रियों विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के अलावा भाजपा के 15, जदयू के 13, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के दो, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक-एक मंत्री शामिल हैं.

महिला मंत्रियों में जदयू से लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता और शीला मंडल, जबकि भाजपा से श्रेयसी सिंह और रमा निषाद शामिल हैं.

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री विजय सिन्हा को कृषि विभाग सौंपा गया है.

निशांत के मंत्रिमंडल में शामिल होने पर प्रतिक्रिया

नीतीश कुमार के बेटे के राजनीति में आने पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, ‘किसी एक मुख्यमंत्री का लड़का राजनीति में आ रहा है, तो यह वो समय है जब बिहार के हर परिवार को यह सोचना चाहिए कि जन सुराज लगातार जो बात कहता रहा है, वह सच साबित हो रही है. नेता का बेटा नेता बनेगा और बिहार के सामान्य परिवार के पढ़े-लिखे बच्चे मजदूरी करेंगे या बेरोज़गार रहेंगे.’

वह आगे कहते हैं, ‘नेता चाहे समाजवादी हो, भाजपाई हो, कांग्रेसी हो या राजद का हो, बूढ़ा हो, युवा हो, अगड़ा हो या पिछड़ा, सभी नेताओं ने अपने बच्चों के लिए राजनीतिक सिंहासन तैयार कर रखा है. चाहे वे जीवनभर जनता से कुछ भी कहते रहें, उन्होंने अपने परिवार की चिंता पहले कर ली है. अब जनता को अपने बच्चों की चिंता करनी चाहिए, नहीं तो उनके बच्चे पढ़-लिखकर भी मजदूर या बेरोज़गार ही रह जाएंगे.

जन सुराज के मुखिया ने कहा, ‘नीतीश कुमार जीवनभर यह दावा करते रहे कि उन्होंने परिवार के लिए कभी कुछ नहीं किया, लेकिन अब उनका बेटा सीधे राजनीति में आ रहा है. उसकी योग्यता क्या है, समाज के लिए उसका योगदान क्या है, यह जनता को तय करना है. इस पर मेरी कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है. लेकिन जो काम दूसरे नेताओं ने किया, वही अब नीतीश कुमार भी कर रहे हैं. लालू यादव ने भी यही किया, कांग्रेस के नेताओं ने भी यही किया, और अब वही रास्ता नीतीश भी अपना रहे हैं.’
निशांत के मंत्रिमंडल में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस एमपी तरीक़ अनवर ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, ‘मुबारक को उनको, लेकिन सवाल यह है कि यह उनका अपना निर्णय है या पार्टी का निर्णय है.’

निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘यहां (सपथग्रहण समारोह स्थल पर) भारी भीड़ जुटी है. एनडीए सरकार के प्रति जनता का स्नेह साफ दिखाई दे रहा है. निशांत कुमार आगे आए हैं और यह जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के लिए सौभाग्य की बात है.’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, ‘निशांत कुमार युवा और शिक्षित हैं, और बिहार को उनसे काफी उम्मीदें हैं. इसी वजह से मुख्यमंत्री ने उन्हें स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी है.’

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ‘अगर ज़्यादा युवा राजनीति में आते हैं तो यह बेहतर है. मैं निशांत कुमार का स्वागत करता हूं.’

वहीं, बिहार के प्रमुख विपक्षी दल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक्स हैंडल पर निशांत के मंत्रिमंडल में शामिल होने को लेकर एक व्यंगात्मक पोस्ट किया गया.

पोस्ट में लिखा गया, ‘परिवारवाद पर आजीवन लेक्चर देने वाले कुर्सी कुमार (नीतीश कुमार) के ‘सामाजिक जीवन में संघर्ष का लंबा इतिहास रखने वाले सुयोग्य सुपुत्र’ को मंत्री पद की शुभकामनाएं.’