तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने टीवीके सुप्रीमो विजय को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह से पहले कम से कम 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है. इस बीच विजय को वामपंथी दलों के समर्थन का संकेत मिला है, जिसके बाद उनके तीसरी बार राज्यपाल से मिलने जाने की ख़बरें सामने आ रही हैं.

नई दिल्ली: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर शुक्रवार (7 मई) को भी असमंजस की स्थिति बनी रही. राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सुप्रीमो विजय को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह से पहले कम से कम 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह दावा किया जा रहा है कि विजय को वामपंथी दलों के समर्थन का संकेत मिला है, जिसके बाद उनके सरकार बनाने का रास्ता बहुत हद तक साफ हो गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, विजय शुक्रवार शाम को राज्यपाल से एक बार फिर मुलाकात करेंगे, जो 4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद टीवीके प्रमुख और राज्यपाल के बीच तीसरी मुलाकात होगी.
इस बीच, टीवीके समर्थकों ने शुक्रवार को चेन्नई के लोकसभा भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें.
मालूम हो कि टीवीके 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. राज्य कांग्रेस ने भी शुक्रवार को राज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
राज्यपाल द्वारा विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं देने के फैसले ने अर्लेकर को सवालों के घेरे में ला दिया है. इसे उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने की आशंका के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि विजय ने एक दिन पहले ही सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में सरकार बनाने का दावा पेश किया था.
इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के कई सहयोगी दल तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए टीवीके में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं. इनमें थोल थिरुमावलवन के नेतृत्व वाली विदुथलाई चिरुथाइगल कत्ची (वीसीके), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) शामिल हैं.
उल्लेखनीय है कि टीवीके के पास 108 विधायक हैं, जबकि वीसीके, माकपा और भाकपा के पास 2-2 विधायक हैं. अगर विजय को इन 6 विधायकों का समर्थन मिल जाता है, तो कांग्रेस के 5 विधायकों (जिन्होंने पहले ही विजय को समर्थन देने का वादा किया है) के साथ टीवीके के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत का आंकड़ा पार कर 119 विधायकों की सरकार बना सकता है.
भाकपा ने इस संबंध में अपनी राज्य कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन देने पर फैसला लिया जाएगा.
पार्टी के तमिलनाडु सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा है कि उनकी पार्टी टीवीके प्रमुख विजय के समर्थन मांगने वाले पत्र का जवाब देगी.
दूसरी ओर, कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के बीच संभावित समझौते को लेकर भी अटकलें तेज हैं. कांग्रेस ने इन खबरों को लेकर एआईएडीएमके और उसकी पूर्व सहयोगी डीएमके दोनों की कड़ी आलोचना की है. अफवाहों में यह संभावना भी शामिल है कि डीएमके, विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए एआईएडीएमके के नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है.
ज्ञात हो कि विधानसभा चुनाव में डीएमके ने 59 सीटें जीती हैं, जबकि एआईएडीएमके के पास 47 विधायक हैं.
इस संबंध में विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ‘दो द्रविड़ पार्टियां. जीवनभर की दुश्मन. रातोंरात एक हो गईं. तमिलनाडु के लिए नहीं. धर्मनिरपेक्षता के लिए नहीं. सिर्फ एक आदमी, विजय को रोकने के लिए. कांग्रेस ने इसे साफ-साफ देख लिया. वह अलग हो गई. आप आरएसएस/भाजपा की बी-टीम के साथ मिलकर खुद को धर्मनिरपेक्ष नहीं कह सकते.’
उन्होंने भाजपा पर राज्यपाल का इस्तेमाल कर ‘समय और विधायकों को खरीदने’ का भी आरोप लगाया.
टैगोर ने आगे कहा, ‘लोकतंत्र में जनता तय करती है कि सरकार कौन बनाएगा… भाजपा राज्यपाल का इस्तेमाल करके समय और विधायकों को ‘खरीद’ रही है. चिंता मत कीजिए, जनता हमारे साथ है और आप जैसे खरीदारों को शर्मिंदा होना पड़ेगा.’
इससे पहले गुरुवार (7 मई) को द न्यूज मिनट ने रिपोर्ट किया था कि डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों को बताया है कि राज्य में ‘तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम’ देखने को मिल रहे हैं और पार्टी नेतृत्व पार्टी के भीतर से उभर रहे कई प्रस्तावों पर विचार कर रहा है.
वहीं, गुरुवार को राज्यपाल अर्लेकर ने विजय को सूचित किया था कि ‘तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है.’
गुरुवार को अर्लेकर के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता गिरीश चोडंकर ने कहा था कि राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. उन्होंने मीडिया से कहा कि बहुमत की परीक्षा विधानसभा में ही हो सकती है.
उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालने का आरोप भी लगाया, जबकि विधानसभा में भाजपा का सिर्फ एक विधायक है.
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई ने 8 मई को जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान करते हुए आरोप लगाया था कि राज्यपाल टीवीके को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश करके संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं.