खसरा सुधार प्रकरण में एसडीएम ने स्वयं मांगी पुनर्विलोकन की अनुमति, कलेक्टर ने दी मंजूरी.

मंगल भारत :सीधी। चुरहट तहसील अंतर्गत ग्राम पड़खुरी 586 के बहुचर्चित खसरा सुधार प्रकरण में उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) चुरहट/रामपुर नैकिन द्वारा स्वयं अपने न्यायालय से पारित आदेश के पुनर्विलोकन की अनुमति मांगी गई, जिसे कलेक्टर सीधी ने स्वीकार करते हुए अनुमति प्रदान कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पूर्व में पारित आदेश पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रकरण क्रमांक 0428/अ-6(अ)1/2020-21 में 19 मई 2025 को खसरा सुधार संबंधी आदेश पारित किया गया था। बाद में निरंजन पटेल, राधे साकेत सहित अन्य प्रभावित भूमिस्वामियों ने शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि राजस्व निरीक्षक द्वारा तैयार सुधार प्रस्ताव त्रुटिपूर्ण था तथा कई प्रभावित पक्षकारों को बिना सूचना एवं बिना सुनवाई का अवसर दिए ही उनकी भूमि प्रभावित कर दी गई।

मामले में प्रस्तुत आपत्तियों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद स्वयं उपखण्ड अधिकारी चुरहट/रामपुर नैकिन ने कलेक्टर सीधी को प्रतिवेदन भेजकर बताया कि राजस्व निरीक्षक द्वारा तैयार सुधार प्रस्ताव में त्रुटियां हैं तथा कुछ हितबद्ध पक्षकारों को सुनवाई का अवसर प्राप्त नहीं हुआ है। एसडीएम ने अपने प्रतिवेदन में संशोधित सुधार प्रस्ताव तैयार कर पुनः आदेश पारित किया जाना उचित बताया तथा पुनर्विलोकन की अनुमति मांगी।
कलेक्टर सीधी ने एसडीएम द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन को समाधानकारक मानते हुए 15 जनवरी 2026 के आदेश के पुनर्विलोकन की अनुमति प्रदान कर दी। साथ ही प्रकरण को पुनः उपखण्ड अधिकारी न्यायालय चुरहट/रामपुर नैकिन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं ग्राम पड़खुरी 586 निवासी रामपति पटेल ने भी मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि खसरा क्रमांक पुराना नंबर 1229 एवं नया नंबर 2076, 2077 अपील वर्ष 2021-22 में अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत आवेदन में शामिल ही नहीं किए गए थे। इतना ही नहीं, 8 नवंबर 2022 के पटवारी प्रतिवेदन एवं स्थल पंचनामा में भी इन खसरा नंबरों का कहीं उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद उपखण्ड अधिकारी कार्यालय चुरहट द्वारा बिना निरीक्षण किए 19 मई 2025 के आदेश में उक्त खसरा नंबर जोड़ दिए गए।
वही अनिल साकेत द्वारा आरोप लगाते हुए कहा कि कि खसरा क्रमांक 1081,1586/1,1586/2 पुराने नंबर जब नए बने जो क्रमशः 1577,1512,1521 को छोटा साकेत द्वारा अपने नाम करा लिया गया
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले की पुनः समीक्षा नहीं होती तो कई भूमिस्वामियों के अधिकार प्रभावित हो सकते थे। अब पूरे मामले की दोबारा सुनवाई और संशोधित आदेश को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।