एमपी के स्कूलों में अब एआई की एंट्री

8वीं से 12वीं तक पढ़ाया जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कौशल
भोपाल/मंगल भारत

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई बड़े फैसले और निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कौशल से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने और गुरु सांदीपनि के जीवन पर रोचक पुस्तक तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी स्कूलों में जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। सभी स्कूलों में बाउंड्री वॉल बनाई जाए और जर्जर स्कूल भवनों की तुरंत मरम्मत कराई जाए। उन्होंने अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से पहले पूरी करने के निर्देश दिए।
शिक्षा घर योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी
बैठक में मुख्यमंत्री ने शिक्षा घर योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी। इस योजना के तहत पढ़ाई बीच में छोड़ चुके किशोर-किशोरियों और युवाओं को दोबारा हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करने का अवसर मिलेगा। योजना का संचालन मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड करेगा। मुख्यमंत्री ने स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और रोजगार आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं। साथ ही एनसीसी, एनएसएस, स्वास्थ्य परीक्षण, ड्राइविंग लाइसेंस कैंप और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग जैसी सुविधाएं भी स्कूलों में उपलब्ध कराई जाएं।
100 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूल के शिक्षकों का होगा सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है, उनके शिक्षकों का सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 स्कूलों ने शत-प्रतिशत रिजल्ट दिया है। समीक्षा बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। कक्षा 1 में नामांकन में 32 प्रतिशत से अधिक और कक्षा 9 से 12 तक में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को मिलेगा सम्मान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के उन स्कूलों को भी सम्मानित करने की बात कही, जहां परीक्षा परिणाम 90 या 95 प्रतिशत से अधिक रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 26 ऐसे स्कूल हैं जहां शत-प्रतिशत परिणाम दर्ज किया गया है और ऐसे संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने शालाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू करने तथा स्व-सहायता समूहों को भी इससे जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सरकारी स्कूलों से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों की आगे की शिक्षा, रोजगार, कृषि कार्य, कौशल प्रशिक्षण या अन्य गतिविधियों की ट्रैकिंग की जाए। इसके अलावा ऐसे हाई स्कूलों की पहचान कर उन्हें हायर सेकेंडरी स्कूलों में अपग्रेड करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया, जहां आसपास उच्च माध्यमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं हैं। नई पहल को राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को तकनीक, कौशल और रोजगारोन्मुखी दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।