संसदीय समिति में विपक्ष ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईंधन की कमी, लंबी क़तारों का मुद्दा उठाया

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती क़ीमतों के बीच संसदीय स्थायी समिति की बैठक में विपक्षी सदस्यों ने देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीज़ल की ‘लंबी क़तारों’ और ‘राशनिंग’ का मुद्दा उठाया, और सरकार द्वारा उठाए जा रहे उपायों के बारे में भी जानकारी मांगी.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच तेल मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार (26 मई) को एक संसदीय स्थायी समिति को बताया कि देश के पास अगले 78 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार मौजूद है.

परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसदीय स्थायी समिति ने संकट के प्रभाव पर चर्चा करने के लिए सोमवार को बैठक की. सूत्रों के हवाला से पीटीआई ने बताया कि अधिकारियों ने समिति को बताया कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि कोई कमी न हो.

रिपोर्ट में कहा गया है कि विपक्षी सदस्यों ने देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की ‘लंबी कतारों’ और ‘राशनिंग’ का मुद्दा उठाया, और सरकार द्वारा उठाए जा रहे उपायों के बारे में भी जानकारी मांगी.

प्रमुख मंत्रालयों – विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, वित्त, वाणिज्य, उर्वरक और बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग – के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के साथ चर्चा में भाग लिया.

जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि 37 भारतीय जहाजों में से 13 अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं. उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है.

बैठक के बाद जदयू सांसद संजय कुमार झा, जो इस समिति के प्रमुख हैं, ने कहा कि बैठक का मुख्य फोकस भारत के समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जहाजरानी बुनियादी ढांचे और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर संकट के प्रभावों पर था; उन्होंने महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार गलियारों में व्यवधानों के बीच समन्वित तैयारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

बैठक से पहले झा ने कहा था कि देश के सामने आ रही समस्याएं ‘भारत द्वारा पैदा नहीं की गई हैं.’ उन्होंने कहा, ‘यह एक वैश्विक समस्या है, भारत द्वारा पैदा की गई समस्या नहीं. यह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है, और इसीलिए यह बैठक बुलाई गई है.’

बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न चिंताओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘हालांकि संघर्ष कहीं और हो रहा है, लेकिन हम पूरी तरह से नई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं. सरकार द्वारा की गई सभी पहलों के संबंध में, खासकर जहाजरानी मंत्रालय के प्रतिनिधि आज आए और उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे नाविकों से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी. सभी संबंधित तथ्य समिति के सामने रखे गए.’

झा ने आगे कहा, ‘पेट्रोलियम और उर्वरक जैसे अन्य मंत्रालयों के अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने आने वाले बुआई सीजन पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की. चूंकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह स्थिति कितने समय तक बनी रहेगी, इसलिए ध्यान इस बात पर है कि प्रभावी दीर्घकालिक योजना कैसे बनाई जाए. मेरा मानना है कि सरकार बहुत सराहनीय काम कर रही है.’